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किसी के चेहरे की मुस्कान बनिए।
 19 October 2019  

यारो,किसी ने मुझसे पूछा:-तुम इतने व्यस्त (Busy) होते हुए भी, इतने पोस्ट करने के लिए, ▪️टाईम कैसे निकाल लेते हो?▪️कितने पैसे मिलते हैं?▪️तुम्हें इन पोस्ट के लिए?▪️क्यों इतने पोस्ट डालते हो?▪️क्या मिलता है तुम्हें??दोस्तों, बस उन लौगों से में सिर्फ.....इतना ही कह पाता हूँ कि, ....रिश्तों को ‘कीमत’ देना सीखो, ‘वक़्त’ अपने आप मिल जायेगा…▪️अगर कुछ लोगों की लाईफ में थोड़ा सा भी सकारात्मक बदलाव और लोगों की सोच को बदल सकूँ, लगेगा जीवन सार्थक हो गया, थोड़ा भी लोगों के चेहरे पर मुस्कान बिखेर सकूं, उनकी जिदंगी को एक तर्क संगत परिणाम तक पहुंचा सकूं, दिल को बहुत सकून प्राप्त होगा, उनकी जिदंगी में खुशियां प्रदान कर पाया, तो अपने आप को इस दुनिया का सबसे खुशनसीब इंसान समझूंगा। ▪️दोस्तों मेरा अनुभव कहता है कि किसी के चेहरे की मुस्कान तो बन कर देखिये, एक हसीन और सुखद एहसास होगा। और दिन प्रतिदिन आपके चेहरे की चमक दोगुनी हो जायेगी, यकीन मानिये जो एक मंहगी से मंहगी फेयरनेस क्रीम से भी नहीं आयेगी, बहुत सम्भाल के लिखना पड़ता है, ज़हन-ए-जज़्बात को, वरना स्याही पे नहीं,गहराई पे सवाल होता है। तुम्हें जीत कर फिर तुम्हीं से हार जाना,यही तो रवायत है, रिश्ता निभाने की। दो लाइने जिनमे बड़ी गहराई है,कुछ रिश्ते हैं.....इसलिए चुप हैं,कुछ चुप हैं.....इसलिए रिश्ते हैं। सुनील माहेश्वरी

बच्चो के संस्कार
 27 September 2019  
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कच्ची उम्र मे अच्छे संस्कार नही दिए तो आपके बिन संस्कार आपका बच्चा बिगड़ सकता हैं आपकी परवरिश पर उंगली उठ सकती हैं आप बच्चो को संस्कार के अभाव मे पालोगे तो बच्चा कुछ बड़ा कर सकता हैं. बच्चे तो बड़ो को देखकर सिखते हैं बड़े गलत कर रहे हो तो बच्चे भी वही करेगे. बचपन मे बच्चो की जिम्मेदारी समझो फिर वह आपकी जिम्मेदारी बड़ेपन मे बखूबी निभाऐगे बच्चो की संगत पर ध्यान नही दोगे तो वह हाथ से निकल जाऐगे. जिस घर मे बचपन से ही बच्चो को अच्छे का पाठ पढा दिया जाए तो वह अच्छे-बूरे की समझ बखूबी समझेगे. कहते हैं घर से संस्कार निकलते हैं लेकिन वह बाहरी बनावट मे काफी घुल-मिल जाते हैं. जब आपका बच्चा ही आपकी बात ही न सुने तो इसका मतलब वह भटक चुका हैं |बच्चो को दौलत के अभाव मे जीना मत सिखाओ कुछ उड़ान भरना सिखाओ. बच्चो को बचपन न खो जाए इसलिए उन पर किसी प्रकार का दबाव न बनाओ|अगर सुख का भोग करना चाहते हो तो संस्कार सिखाओ फिर भोग का प्रसाद अवश्य मिलेगा. बच्चे तो बच्चो वाली हरकते करेगे लेकिन बड़े ही अपने मार्ग से भटक जाऐगे तो बच्चे क्या करेगे?माँ-बाप की हर बातो को बच्चे अगर नजर अंदाज करेगे तो आगे जाकर निश्चित गलत परिणाम मिलना तय हैं 

Sabko apni kahani milegi
 3 September 2019  
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कभी लिखने का भी सोचा है, वो बोले ऐसेहाँ सोचा है, मत पूछो कैसे...तो क्या लिखना है, और कब लिखना हैजो भी लिखना है वो तय नहीं हैजो तय है वो कि अब लिखना है.तुम खुद का लेखन देख के पढ़तेक्या याद नहीं  ख़ुद क्या लिखते हो?तुम अपने अक्षर खुद भूले होये जो भी है, तुमने ही लिखा है?हम्म... हाँ देखूँगा मैंने जो लिखा हैअरे मेरी है, मैंने ही लिखा हैपूछ लो बल्कि इस काग़ज़ सेरात मे थी वो किसके घर पे,कह देती सब सच वो तुमसे..पर बदनामी का डर उसको है,ग़र काग़ज़ मेरी डर जाएगीक्या ख़ाक कभी फिर लिख पाउंगा..कलम है स्याही से वंचित जो,क्या ख़ाक कभी उसे भर पाउंगा..कहते हैं मसरूफ वो लेखक,लिख ना सका तो मर जाऊँगा.हाँ देखूँगा फिरसे काग़ज़ कोमान लो मेरी इस आदत को.तो लिख भी लो कुछअरे लिखता हूँ ना..और सुनो..आज लिखूँगा ऐसा मै,कि नाम मेरा गुलज़ार बनेगा..खिड़की देखी काग़ज़ को,आजा राजा निकालते हैं हम..निकल गए बेशर्मी से वो,हस के बोले.."अबे तुझ जैसा गुलज़ार बनेगा" ?ओहो.. बेशरम थेसही कह रहे हो..कोई बात नही, मन बादलोकिवाड़ लगाओ.. चाय गरमाओऔर नीचे देखो..किइसी मोहल्ले में भागा करते थे जो कभी नंगे पांव,आज भूरी माटी लाल किए हैं वो,गुड्डा गुड़िया का जोड़ा सिलते थे जो नासमझ,नशे मे कपड़े उधेड रहे हैं वो।शिकायत थी जिसको तराजू से अब तक,अभी से वो इंसा बदल सा गया है,बिगड़ने की सबको आदत लगी है,सुधरने की कोशिश बहलने गई है,घर घर पीटा, जमकर पीटा,रात दोपहरी सबसे पूछा ऐसा की सब बात बता दें,सबने बोला हम बोलेंगे, कहने का बस दाम बता दे.पूछा मैंने घर था मेरा खिड़की जिसकी छत पे थी,दरवाजा पैंचीदा था और आँगन मेरा भीगा था,सीढ़ी नीचे की कच्ची थी, और पीली घर की पट्टी थी।मैं छत के ऊपर सोता था तो खूब मज़ा सा आता थारोटी दूध आम और चिवडा सान हाथ से खाता थाएक पौं पौं करता कुल्फी वाला शाम को जैसे आता थाकुर्सी पे चढ़ के, सिक्का खिसकाकेमैं चींख दौड़ के जाता था.वो कुल्फी बोलो कैसी है?कभी बुरा लगा है बिना वजह,और वजह जानने का मन भी ना हो,पर रोने रोने सा दिल हो जाए,कुछ करने से ये तन घबराए..मरने की पर बात क्या करनालोगों का गुस्सा काफी है..मेरा ऐसा सा कुछ है कि..गुस्सा आग सा मुझको इक बार ना आयाइक बार जो आया इक बात बतायाये गुस्सा जो है, वो किस पे आया?उसपे आया.. जो आकर बोले..काग़ज़ अपनी, बेगम अपनीबेगम का दुपट्टा अपना, बेगम का सपना भी अपनाबेगम की बेटी.. उसकी हैबेटी का दिल ख्वाहिश है अपना,अगला बेटा पक्का ही है, पक्का है तो वो भी अपनाजल्दी झांको दाई ओ बूढ़ीगलत किया तो मिलना मत तुममिली अगर तुम मरी मिलोगीदफन ना जाने कहीं पे नंगा..होगा मेरा देश महान, मेरे घर मै ही भगवान..ऋतिक राय

VIP
 29 August 2019  
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हाल ही में मोदी सरकार ने जिस तरह लालबत्ती की चलन को समाप्त कर एक नई सोच का पहल किया है वह सराहनीय है और VIP के जगह EIP यानी every important person का जिक्र किया हैं मानवीय  प्रधानमंत्री ने मन की बात में कही थी वह शायद देश की जनता के अहमियत को दर्शाता है ।इस प्रकार के निर्णय से यह तो तय हो गया है कि छोटे लेकिन महत्वपूर्ण परिवर्तन देश में किए गए हैं लेकिन सरकार को  कैबिनेट मंत्रियों के लिए भी एक  महत्वपूर्ण निर्णय लेने की आवश्यकता है जो योग्यता को दर्शाए कम से कम कैबिनेट मंत्री होने के लिए स्नातक तक की पढ़ाई की गई हो ताकि योग्य एवं कुशल लोगों की फौज तैयार की जा सके जिसके तहत अफसरशाही व्यवस्था के अंतर्गत आने वाले अफसरों को भी स्वाभिमान से कार्य करने का मौका मिल सके !~ Mayank kumar ( singh ) 

# संबंध
 29 August 2019  
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अच्छे संबंध , स्वस्थ विचार और पवित्र गठबंधन का गला घोटा जाता है तो इंसान अंदर से टूट जाता है क्योंकि कहीं न कहीं उसके विश्वास का क़त्ल किया जाता हैं और साथ ही साथ ऐसा महसूस होता हैं कि किसी घनिष्ट मित्र जिसे हम अपना सबसे अच्छा हमसफ़र मानते हैं वो ही जयचन्द बनकर विश्वासघाट करता हैं !हम किसी की प्रतिष्ठा बचाने के लिए सरेआम बदलाम होते रहते हैं और वो इंसान हमें पागल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते , वो हमें दुनिया की नज़र में एक पागल एवं सनकी इंसान की संज्ञा दिलवाना चाहते हैं । उन्हें लगता हैं वो दो चेहरे वाला इंसान बनकर हमारे नज़र में कुछ और समाज की नजर में कुछ और रहेंगे !! दिल से दिया सम्मान को वो एक सीधे व्यक्ति का बेवकूफ़ी समझते हैं ! और उन्हें लगता हैं वो बातों के भूल-भुलैया में हमें घुमा देंगे ! समझते तो हम सब पहले थे और सब आज भी .......! पर हमें रिश्तों का सम्मान करना आता हैं ,किसी से किया वादा का मान रखना आता हैं ।पर , उनका फिदरत गिरगिट जैसे रंग बदलने का था और हैं इसलिए तो वो खुद को मौके की तराजू में तौलते हैं !!- स्वलिखित

आईने भी क्या झूठ बोलते हैं
 29 August 2019  
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आईने भी क्या झूठ बोलते हैं ! अनेक चेहरा अपने अंदर हमें दिखाते हैं , हर एक आईना कुछ कहता है । हमारे साथ शायद कुछ साजिश भी करता है ।कोई आईना हमें उत्कृष्ट बताता तो कुछ आईने हमें औसत तो कई आईने तो इस शक में डाल देते हैं कि हम औसत से भी कम हैं 😊 शायद आईने झूठ बोलते हैं 😉 वह कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ रोज साजिश करते हैं हमारी ही चेहरे के साथ अनेक उलझन के घोसले लटका देते हैं ।कितने बेचारे तो इसी चिंता में 24 घंटे गुजार देते हैं कि हमारा चेहरा कहीं हमारा ही श्राप ना बन जाए किसी और चेहरे का हम शिकार ना बन जाए जिसके लिए इंप्रेशन झाड़ना था कहीं वह किसी का प्रॉपर्टी ना बन जाए और हम किसी गरीब किसान  की तरह दिन रात किसानी करें और मुनाफा कोई और ले जाए !!शायद यह सब सोच एक आईना के चलते ही होता है क्योंकि कोई आईना तो वास्तविकता से हमारा भेंट करवा देता है तो कोई आईना मृगतृष्णा की भांति हमसे दिन रात छलावा करता है जिसके कारण हम प्रायः दुखी होते हैं । तो जीवन में हमें ऐसे आईने के साथ होना चाहिये जो हमारे आलोचक हो !!वैसे क्या हमें सब कुछ आईने पर ही छोड़ना चाहिए या उन पर भी जो हमारी वास्तविक सुंदरता को पहचानते हैं । क्योंकि आईना हमारा एक रुप ही दिखा सकता है । वास्तविक रूप तो हमारे आस पास के लोग ही ; लेकिन अगर वह आईने से थोड़ा अलग हो तो ! क्योंकि आसपास का समाज जिसे वास्तव में हम समाज समझ रहे हैं वह भी कई आईनों में बटा है तो आईनो से सावधान ! ☺️- स्वलिखित

अखण्ड भारत का एक नया दौर - अंकित भोई 'अद्वितीय'
 8 August 2019  
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देश के इतिहास में विगत 05 अगस्त 2019 की तिथि स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गयी। सालों से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र संघ जैसे वैश्विक संघ में चन्द देशों के वीटो पॉवर का दंश झेल रहा देश यथार्थतः आन्तरिक तौर पर भी हितों की असमानता से संघर्ष कर रहा था। प्राकृतिक दृष्टि से देश का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन का बेजोड़ मसौदा तैयार कर सरकार ने स्थानीय आवाम के साथ-साथ पूरे देश को खुलकर जीने का मौका दे दिया। इससे न केवल भौगोलिक बदलाव हुए बल्कि सार्वभौमिक तौर पर यह एक क्रान्तिकारी घटना के रूप में इतिहास में दर्ज हो गया। एकल नागरिकता, एक ही पताका, राज्य व केन्द्र शासित प्रदेशों के लोक हितैषी विभाजन समेत अन्य निर्णयों से निश्चय ही देश को वो मान मिला जिसका वो वर्षों से हक़दार था।      भारतीय संविधान में देश को सम्पूर्ण प्रभुत्व संपन्न, लोकतंत्रात्मक, धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी गणराज्य की संज्ञा दी गयी है किन्तु माँ भारती का महिमामण्डन करती ये पंक्तियाँ वास्तव में अब जाकर सार्थक सिद्ध हुयी हैं। आतंक के खिलाफ पहले भी सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक समेत अनेक सराहनीय कदम उठाये हैं पर यह निर्णय बिना किसी हथियार के एक घातक प्रहार के समान है जो निश्चय ही पाकिस्तान के नापाक इरादों पर नकेल कसने में सफल साबित होगा।           इतिहास के पन्ने पलट कर देखा जाये तो भारतीय राजनीति की सबसे बड़ी खासियत रही है कि जब-जब राष्ट्रहित की बात आती है तो विभिन्न दलों के प्रतिनिधि वैयक्तिक हितों का परित्याग कर एक ही मंच पर आ खड़े होते हैं। कश्मीर को लेकर हुए  इस बड़े फैसले के नए राजनीतिक मायने भी खुलकर सामने आये, बसपा और आप जैसे राष्ट्रीय दलों ने भी इस फैसले की सराहना की और सरकार के साथ खड़े नज़र आये। देश की आवाम को भी इस बात पर फक्र होगा कि उनके मत ने समानता के उस मौलिक अधिकार पर जमे उस धूल को साफ कर दिया जो सालों से जमे हुए थे और किसी ने इसके नैतिक सफाई की जहमत नहीं उठाई थी। वर्तमान भारतीय राजनीति भी संक्रमणकाल से गुजर रही है, आवाम भी आशा व आशंका के मिश्रित मनोभावों से नवीन भारत में अपना भविष्य तलाश रही है। नवीन सरकार के स्थापना के चन्द महीनों बाद ही यह ऐतिहासिक फैसला निश्चित रूप से सुकून देने वाला है।           सरकार के इस फैसले से निश्चित तौर पर पाकिस्तान और उसकी कुख्यात ख़ुफ़िया संगठनों के खतरनाक मंसूबों को तगड़ा झटका लगा है और वो पलटवार के लिए तैयार होंगे। अंग्रेजी में एक कहावत है "Prevention is better than Cure" अर्थात् सुरक्षा से सतर्कता बेहतर होती है, इस बात को नज़रअंदाज़ न करते हुए सरकार को आतंरिक तौर प्रत्येक भावी सामरिक परिस्थितियों की लिए भी तैयार रहना चाहिए। राष्ट्रीय स्वाभिमान का स्तर इतना उच्च हो कि देश का प्रत्येक व्यक्ति आन-बान-शान से सिर उठाकर कह सके "सौगंध मुझे इस मिट्टी की, मैं देश नहीं मिटने दूंगा, मैं देश नहीं मिटने दूंगा, मैं देश नहीं झुकने दूंगा।"                                                                              - अंकित भोई 'अद्वितीय' महासमुन्द (छत्तीसगढ़)

जीवन जीने की कला
 31 July 2019  
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कुछ लोग तो जीते जी मर जाया करते हैं पर ऐ यार हम तो मरने के बाद भी जीने की तमन्ना रखते हैं यह तभी संभव है जब हम खुद में शांति बनाए रखें।खुशी और शांति तो हममें ही होती है पर हम उसकी उपेक्षा करके उसे बाहर ढूंढते रहते हैं। ठीक वैसे ही जैसे कौवे के मुंह में दांतों को ढूंढना हमारी एक खोज तभी सार्थक होगी जब हम लोग मृग मरीचिका की ओर दौड़ना छोड़कर स्वयं में स्वयं को ढूंढने का प्रयास करें। हमें यह ध्यान में रखना चाहिए कि, पीस भगवान की दी हुई गिफ्ट नहीं है यह तो हमारी गिफ्ट है दूसरों के लिए और हमें बाह्य सौंदर्य से आकर्षित न होकर आध्यात्मिक सुंदरता से प्रभावित होना चाहिए तभी हमारा किसी के प्रति प्यार अपनापन चिरकाल तक रह सकता है। जीवन जीना इतना आसान भी नहीं है क्योंकि यह कई बाधाओं से ,कष्टों से भरा हुआ है और यह कहना कि इनकी उपेक्षा करनी चाहिए तो यह इसका हल नहीं है अगर किसी समस्या का हल निकालना है तो जिस स्तर पर समस्या उत्पन्न हुई है उसी स्तर पर रहकर उसका हल नहीं निकल सकता ।उसका हल निकालने के लिए हमें उससे एक स्तर ऊपर आना होगा और यह मुश्किल भी नहीं है, अगर हमारे जीने का उद्देश्य हमारा लक्ष्य बड़ा है हमारी महत्वाकांक्षा ऊंची है हमारे किसी को किए हुए वादों में गहराई है और हमारे प्रयत्न किसी के पथ प्रदर्शक हैं। यह सब तभी संभव है जब मानसिक स्तर पर शांति हो और शांति तभी संभव है जब हमारा शरीर रिलैक्स्ड हो ,काम हो और यह तब संभव है जब हम योग आदि गतिविधियों से जुड़े। आज की व्यस्त जिंदगी ने हमें इतना मशगूल कर दिया है कि हमारे लिए हमारे शरीर की कोई अहमियत ही नहीं रह गई है पर समझने की बात यह है कि, अगर मशीन भी चलाते हैं तो उसे भी सर्विसिंग की जरूरत होती है सिर्फ पैट्रोल, ऑयल से काम नहीं चलता वैसे ही हमारा शरीर भी सर्विसिंग चाहता है । योग व्यायाम के रूप में क्योंकि यही है जो शरीर के सारे कल पुर्जों को चुस्त-दुरुस्त रखता है ।आप सोच रहे होंगे कि जीवन जीने की कला पर बोलना है और यह कहां पहुंच गईं । पर मेरे मित्रों अगर हम मकान को आलीशान बनाने की बात करें पर उसकी नींव  की मजबूती की उपेक्षा करें तो वह मकान कब तक मकान बना रहेगा। तो मैं अपनी बातों को यही कहते हुए विराम देती हूं कि शांति, धैर्य,खुशी ,योग यही मूल मंत्र है जीवन को सफल बनाने के श्री श्री रविशंकर ने क्या खूब कहा है -"खुद के घर को भगवान का घर बनाओ वहां हमेशा प्रकाश प्यार और उन्नति होगी ।खुद के शरीर को भगवान का मंदिर बनाओ और वहां हमेशा शांति और आध्यात्मिक खुशी होगी। खुद के माइंड को भगवान का खिलौना समझो तो हम उसके सारे खेल को देख और एंजॉय कर सकते हैं।