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प्रेम
 27 April 2020  
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कितना अजीब है ना. हुमेशा से मुझे ऐसे वक़्त की आस रही जहाँ में कुछ कर सकूँ. ऐसा कुछ जिसमें में अपनी क्रियेटिविटी, टॅलेंट ओर इंटेरेस्ट को इस्तेमाल करके कुछ कर सकूँ, कुछ प्रोडक्टिव. सोचती थी अपने इंट्रेस्ट्स को बिज़्नेस में बी तब्दील कर लूँगी. पर आजकल जैसे कुछ सूझ ही नही रहा है.मैं लिखने की शौकीन हूँ पर ज़्यादा कुच्छ दिमाग़ में आता नही आजकल. हो सकता है की निशांत के साथ रहते हुए मुझे केवल खुशी का ही एहसास है ओर सूकून का भी. मुझे ऐसा पति मिला भी है. कल रात में ज़िंदगी गुलज़ार देख रही थी दोबारा. बहुत ही खूबसूरती से लिखा हुआ सीरियल है. पहली बार जब देखा था तो कहीं कहीं पर वो सारी रोमॅंटिक बातें देख के ओवर दा टॉप लगती थी. लेकिन कल रात में निशांत के बारे में सोचने लगी. सीरियल की हेरोयिन की तरह मुझे भी शायद निशांत से गहरी मोहब्बत हो रही है. मोहब्बत पहले भी थी पर मैं उसे शदीद आकर्षण का ही नाम दूँगी. पहले मैं काफ़ी हद्द तक उसके अच्छे नेचर ओर अपने लिए उसके ढेर सारे प्यार से मुतासिर थी पर अब एक अजीब सी आदत बनती जा रहा है वो मेरी. उसके हाथों की च्छुअन- दा टच, उसके बदन की महक से मेरी अच्छी ख़ासी पहचान हो गयी है. कई बार सोचती हूँ ऐसा वाकई हो सकता है क्या की मुझे कोई इतना पसंद करे. ना केवल पसंद बल्कि इतना प्यार करे. सच बताउन तो मुझे लगता था की कुछ दिनो में वो मुझसे परेशान हो जाएगा पर वो मेरा ख़याल करने में ओर मुझे समझने में वो मेरी इनसेक्युरिटीस से दो कदम आगे ही रहता है. पता नही ये सारी इनसेक्युरिटीस आई कहाँ से हैं मुझमें. शायद बहुत सारे रिजेक्षन्स देखें हैं मैने ज़िंदगी के. ओर शायद ये भी की ज़िंदगी की काफ़ी सारी चीज़ों का रिजेक्षन मैने खुद भी किया है. सबसे बड़ा रिजेक्षन  तो मुझे ज़िंदगी ने तब दिया जब मेरी माँ को मुझ से छिन गयी. लगने लगा किस्मत, भगवान सबने ही मुझे रिजेक्ट किया है. उसके बाद से ही मुझे हर चीज़ से बदगुमानी, अविश्वास होने लगा. कुछ माज़ी के तज़ुरबों ने भी मेरी पर्सनॅलिटी में अतियात की जगह बना ली थी. निशांत से पहली मुलाक़ातों में भी काफ़ी कुछ अपने अंदर समाए हुए थी. आज पूरे एक साल बाद भी ओर शादी के चार महीने बाद भी कयि सारी दीवारें हैं जो मेरे दिल के आस पास हैं. काफ़ी कुछ में शेयर नही करती हूँ आज भी उससे. डर लगता है की कहीं ये इनसेक्युरिटीस उसके सामने ना आ जाएं. लेकिन पता है ज़्यादा इन्हे च्छुपा नही पवँगी . क्यूंकी ये श्क्स अपने प्यार ओर ख़ूलुस से मेरी अंदर च्छूपी सारी दीवारों को धीरे धीरे गिरा रहा है. ओर मैं कैसे ना पिघलू, वो इस कदर अपने आपको मुझे सौंप देता है की मेरे सारे कवच ढीले पढ़ जाते हैं. इस तरह से मेरा बन जाता है, मुझे पे इस तरह से अपनी ज़िम्मेदारी सौंप देता है की मैं बहुत सारे एहसासों के बवंडर में डूब जाती हूँ. एक दम से विश्वास तो नही हो पाता किी में किसिके लिए इतनी ख़ास कैसे हूँ. पर यकीन मानिए ये एहसास इंतिहाही हसीन है. बहुत खुमारी है इसमेंआजकल निशांत को नींद में ताकते ताकते वक़्त का पता ही नही चलता. ऐसा नही है की मैं उसे देखते हुए दंपत्या जीवन से जुड़ी हुई बातों पे विचार करती हूँ. ओर उसके ओर मेरे भविष्या के बारे में भी नही सोचती. सोचना भी नही चाहती चाहे इसमें रिस्क ही क्यूँ ना हो. बस उसे देखना बहुत अच्छा लगता है उसे.  इन एहसासों को में समझा नही सकती क्यूंकी मुझे ये खुद समझ नही आ रहे. फिर भी इन एहसाँसों में रहना आजकल मेरे लिए दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज़ है. शायद  प्यार के समुंदर में लोग ऐसे ही डूबते होंगे.

उन्नति
 21 April 2020  
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तकलीफ़ोंकेगलियारेसेगुजरजरूररहेहैंलेकिनअपनोंकेसाथअपनापनमहसूसकररहेहैं।सभीजोवक्तकेहाथोंकठपुतलीबनचुकेथे।आजखुदकीतालपरथिरकरहेहैं।प्रदूषण,कोलाहल,जिंदगीकीभागदौड़तोमानोगर्मतवेपरपड़ेपानीकीतरहभापबनकरउड़चुकीहैं।आजसभीघरमेंरहकरनया-नयाकरनेकीपहलकररहेहैं।नसिर्फप्रकृतिसेअपितुमानवजीवनसेभीकोहराहटगयाहै,धुंधछटगईहै।मनमंथनकेलिएसभीकोपर्याप्तसमयमिलाहै।घरमेंरहकरनसिर्फघरकेप्रतिजागरूकहुएहैं।अपितुप्रकृतिकीओरभीखींचेजारहेहैं।सात्विकजीवनअपनारहेहैं।नप्रदूषण,नट्रैफिककीसमस्याघरसेहीकार्यालयकेकार्यभीसुचारूरूपसेहोरहेहैं।कार्यक्षमतामेंभीबढावाहुआहै।जीवनकोनयाआयाममिलाहै।प्राथमिकताएंबदलीहैंलेकिनवैक्सीनबनजानेकेबादजबकोरोनावायरसकेआतंककाअस्तहोजाएगातबकहींहमइसअच्छेबदलावकोहाशिएमेंडालकरफिरवहीपुरानीतनावयुक्तदिनचर्यानअपनालें।नगाड़ेकीतरहबर्तावनकरनेलगें।जिसपरकितनाभीमारोउसकाअपनाहीसंगीतनिकलताहै।लेकिनहमसबजानतेहैं।उम्मीदोंपरदुनियाटिकीहै।अतःविश्वासहैकि,लाॅकडाउनकेदौरानहमारेजीवनमेंजोनयाउजासआयाहैवहयकीननबनारहेगाऔरहमाराहरकदमउन्नतिकीओरतोबढ़ेगालेकिनअबउसमेंप्रकृतिकीअवनतिनहींछुपीहोगी।

अखबार व पत्रिकाओं से अपेक्षाएं
 13 February 2020  
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रोज सुबह उठते ही चाय की पहली चुस्की के साथ समाचार पत्र का पहला पन्ना पढ़ा जाता है। और यह पहला पन्ना ही पूरे दिन की आपकी मानसिकता निर्धारित कर देता है। सकारात्मक समाचार जहां चेहरे पर हल्की मुस्कान ले आता है वही नकारात्मक दिन की शुरुआत को दिशाहीन बना देता है। कहते हैं "साहित्य समाज का दर्पण" होता है। लेकिन मेरी सोच थोड़ी अलग है। मेरा मानना है कि, साहित्य को न सिर्फ समाज का दर्पण होना चाहिए बल्कि समाज को एक दर्पण भी दिखाना चाहिए कि, साहित्य समाज से क्या अपेक्षा रखता है और साहित्य के अनुसार समाज कैसा होना चाहिए। अतः समाचार पत्र अगर इन दोनों भाव में संतुलन स्थापित कर पाता है तो समाचार पत्र के अंतिम पन्ने तक पहुंचते-पहुंचते पाठक को नया सोचने के लिए बहुत कुछ मिल जाएगा। वह नए समाज की कल्पना कर पाएगा। कहा भी गया है हम जैसा सोचेंगे समाज भी वैसा ही बनेगा अगर हर वक्त दुख की ही बातें करेंगे, क्या खोया का दुखड़ा रोएंगे तो सुकून का मिलना मुश्किल होगा। और अगर सुख, खुशी से साक्षात्कार होता भी है तो उसे उसकी चरम सीमा तक जी नहीं पाएंगे । लेकिन अगर सुखो की ही बात करेंगे तो दुख भी दुख नहीं लगेगा। रचनात्मकता कलात्मकता कुछ नया लिखने में हैं, सोच को, कल्पना को परवाज़ देने में हैं समाज में घटित घटनाओं को व्याकरण व भाषा से सजा देने में नहीं। अतः अगर समाचार पत्र इन बातों का ध्यान रखें तो पाठकों का यह बोलना छूट जाएगा कि पत्र में होता ही क्या है रोज  एक ही खबर मारधाड़ की या फिर कोई और नरक तुल्य घटना की।

वसंत ऋतु
 9 February 2020  
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वसंत ऋतुआज दिन है देखो कितना सुहानायह तो मौसम है जाना पहचानाजीवन में वसंत नई खुशियाँ लाते हैंघर –आँगन खुशियों से महकाते हैंइस वसंत को देख मन मेरा मुस्काएहर जगह खुशहाली ही छा जाएमिल गई अब तो सर्दी से राहतइस मौसम की मुझे थी कब से चाहतकोयल मीठे –मीठे गीत सुनातीसब के दिल को बहुत ही हर्षातीप्रकृति में फैली है खुशबू अपारफूलों पर ,पेड़ों पर ,पत्तों परहाँ नए रंगों की खुशबू  जैसे भरमारकलकल करती नदियाँ बहतीदृढ़ विश्वास मन में है भरतीठंडी ठंडी हवा निरालीबहती रहती जैसे हो मतवालीफसलों से बढ़ता जाता प्यारफसलें पक कर है अब कटने को तैयारसरसों के पीले-पीले फूलखिल खिल कर मुस्कुराते हैंजीवन में वसंत नई खुशियाँ लाते हैंघर –आँगन खुशियों से महकाते हैंसोनी गुप्ता कालकाजी नई दिल्ली -19

भगवान कृष्ण का स्वरूप
 31 January 2020  

😇☝🏼क्या सिखाता है भगवान कृष्ण का स्वरूप ?कभी सोचा है भगवान कृष्ण का स्वरूप हमें क्या सिखाता है। क्यों भगवान जंगल में पेड़ के नीचे खड़े बांसुरी बजा रहे हैं, मोरमुकुट पहने, तन पर पीतांबरी, गले में वैजयंती की माला, साथ में राधा, पीछे गाय। कृष्ण की यह छवि हमें क्या प्रेरणा देती है। क्यों कृष्ण का रूप इतना मनोहर लगता है। दरअसल कृष्ण हमें जीवन जीना सिखाते हैं, उनका यह स्वरूप अगर गहराई से समझा जाए तो इसमें हमें सफल जीवन के कई सूत्र मिलते हैं। विद्वानों का मत है कि भगवान विरोधाभास में दिखता है।आइए जानते हैं कृष्ण की छवि के क्या मायने हैं।1. मोर मुकुट - भगवान के मुकुट में मोर का पंख है। यह बताता है कि जीवन में विभिन्न रंग हैं। ये रंग हमारे जीवन के भाव हैं। सुख है तो दुख भी है, सफलता है तो असफलता भी, मिलन है तो बिछोह भी। जीवन इन्हीं रंगों से मिलकर बना है। जीवन से जो मिले उसे माथे लगाकर अंगीकार कर लो। इसलिए मोर मुकुट भगवान के सिर पर है।2. बांसुरी - भगवान बांसुरी बजा रहे हैं, मतलब जीवन में कैसी भी घडी आए हमें घबराना नहीं चाहिए। भीतर से शांति हो तो संगीत जीवन में उतरता है। ऐसे ही अगर भक्ति पानी है तो अपने भीतर शांति कायम करने का प्रयास करें।3. वैजयंती माला - भगवान के गले में वैजयंती माला है, यह कमल के बीजों से बनती है। इसके दो मतलब हैं कलम के बीच सख्त होते हैं, कभी टूटते नहीं, सड़ते नहीं, हमेशा चमकदार बने रहते हैं। भगवान कह रहे हैं जब तक जीवन है तब तक ऐसे रहो जिससे तुम्हें देखकर कोई दुखी न हो। दूसरा यह माला बीज की है और बीज ही है जिसकी मंजिल होती है भूमि। भगवान कहते हैं जमीन से जुड़े रहो, कितने भी बड़े क्यों न बन जाओ, हमेशा अपने अस्तित्व की असलियत के नजदीक रहो।4. पीतांबर - पीला रंग सम्पन्नता का प्रतीक है। भगवान कहते हैं ऐसा पुरुषार्थ करो कि सम्पन्नता खुद आप तक चल कर आए। इससे जीवन में शांति का मार्ग खुलेगा।5. कमरबंद - भगवान ने पीतांबर को ही कमरबंद बना रखा है। इसका अर्थ है हमेशा चुनौतियों के लिए तैयार रहें। धर्म के पक्ष में जब भी कोई कर्म करना पड़े हमेशा तैयार रहें।6. राधा - कृष्ण के साथ राधा भी है। इसका अर्थ है जीवन में स्त्रीयों का महत्व भी है। उन्हें पूर्ण सम्मान दें। वे हमारी बराबरी में रहें, हमसे नीचे नहीं। —

बसंत पंचमी
 31 January 2020  

ॐ सरस्वती मया दृष्ट्वा, वीणा पुस्तक धारणीम् । हंस वाहिनी समायुक्ता मां विद्या दान करोतु में ॐ ।।बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करने से बुद्धि और ज्ञान बढ़ता है. बसंत पंचमी दिन स्नान का भी खास महत्व माना जाता है. इस बार बसंत पंचमी की पूजा 30 जनवरी को की जा रही है. बसंत पंचमी आते ही वसंत ऋतु की शुरुआत हो जाती है.बसंत पंचमी का दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित है. इस दिन मां सरस्वती को ज्ञान और वाणी की शक्ति के रूप में पूजा जाता है. मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करने से बुद्धि और ज्ञान बढ़ता है. बसंत पंचमी दिन स्नान का भी खास महत्व माना जाता है. इस बार बसंत पंचमी की पूजा 30 जनवरी को की जा रही है.बसंत पंचमी को श्री पंचमी, सरस्वती पंचमी, ऋषि पंचमी नामों से भी जाना जाता है. मान्यता है कि इसी दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था. ऋग्वेद के अनुसार ब्रह्मा जी अपनी सृष्टी के सृजन से संतुष्ट नहीं थे. चारों तरफ मौन छाया हुआ था. तब उन्होंने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, जिससे हाथ में वीणा लिए एक चतुर्भुजी स्त्री प्रकट हुईं. ब्रह्माजी के आदेश पर देवी ने वीणा पर मधुर सुर छेड़ा जिससे संसार को ध्वनि और वाणी मिली. इसके बाद ब्रह्मा जी ने इस देवी का नाम सरस्वती रखा, जिन्हें शारदा और वीणावादनी के नाम से भी जानते हैं. बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती का पूजन करते हैं.