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इन दिनों सोशल मीडिया पर ललित मोदी और सुष्मिता सेन की लव स्टोरी यानी शादी को लेकर खूब सारे पोस्ट वायरल हो रही हैं। अगर सीधे शब्दों में बोलूं तो सुष्मिता सेन और ललित मोदी के इस प्रेम का मजाक बनाया जा रहा है। यह पहली घटना नहीं है बल्कि इससे पहले भी जब किसी उम्रदराज आदमी ने शादी की या अपने से बहुत कम उम्र की लड़की से शादी की तो उसका भी मजाक बनाया जाता आ रहा है। ऐसे में सवाल यह उत्पन्न होता है कि हम किन्ही दो लोगों के प्रेम को स्वीकार क्यों नहीं कर पाते ? क्या प्रेम को लेकर आज भी हमारे समाज में घृणा है या प्रेम की समझ हमारे समाज को आज भी नहीं है ?

भारतीय संविधान के तहत 18 वर्ष के बाद सभी लड़के, लड़कियां बालिक हो जाती है। जिसके बाद से उन सभी को अपने जीवन के फैसले लेने का अधिकार होता है। जब ललित मोदी और सुष्मिता सेन 18 वर्ष से ऊपर है तो फिर हम लोग कौन होते हैं उनके प्रेम का मजाक बनाने वाले और उन पर हंसने वाले ? क्या इस तरह की घटना हमारे समाज की मूर्खता को नहीं दर्शाता है ? 

सुष्मिता सेन और ललित मोदी ने एक साथ चलने का फैसला किया है। यह दोनों लोग अपने जीवन में सफल लोग हैं। इनके अपने अपने बिजनेस है और इनकी करोड़ों की संपत्ति है। किसी के प्रेम का मजाक बनाना कहां तक सही है ? क्या प्रेम सिर्फ दो युवा लोग ही कर सकते हैं ? खैर जो भी हो, मगर हमें किसी के प्रेम का मजाक नहीं बनाना चाहिए और प्रेम के प्रति अपना नजरिए को बदलने की कोशिश करनी चाहिए। प्रेम अनमोल है, यह ना उम्र देखता है, ना पैसा देखता है, ना ही इंसान का रंग दिखता है, ना ही जाति देखता है और ना ही धर्म देखता है। 

समाज के इसी डर से कई लोगों का प्रेम तबाह हो जाता है और कई लोग सुसाइड कर लेते हैं। हमारे समाज को प्रेम के प्रति अपना नजरिया बदलना चाहिए। तभी हम एक प्रेम पूर्वक समाज की स्थापना कर पाएंगे। 

- दीपक कोहली