Image



1

वृषभ - शारीरिक गठन

वृषभ राशि वालों के हाथ की बनावट चौकोर होती है। उनकी लंबाई कम तथा चौड़ाई अधिक रहती है तथा अंगूठा कुछ बड़ा होता है और उसे पीछे मोड़ पाना संभव नहीं होता। वृषभ राशि कंठ पर विशेष प्रभावकारी होती है। इस कारण इस राशि के लोगों में बोलने की असाधारण क्षमता होती है। वृषभ राशि वाले व्यक्ति शरीर से दुर्बल हों, तो उन्हें पौष्टिक अन्न अधिक ग्रहण करना चाहिए तथा चर्बी युक्त पदार्थ कम खाना चाहिए। इस राशि वाले व्यक्तियों को इंद्रिय, अंगुली अथवा गाल पर तिल या मस्से का चिन्ह अवश्य रहता है, जिन व्यक्तियों के हाथ की अंगुली अथवा गाल पर तिल होता है, उनके पास पैसा नहीं बचता है।

2

वृषभ - व्यवसाय

इस राशि के जातक सौंदर्य को विशेष महत्व देते हैं। उन्हें हर कार्य में कलात्मकता पसंद है। कार्य को सुरुचिपूर्ण ढंग से करना चाहते हैं। ललित कला, शराब, रेस्टोरेंट, होटल, संगीत, तेल व्यवसाय, गायन, नृत्य, कलाकार, अभिनेता, श्रृंगार व सजावट की वस्तुएं, आभूषण, कलात्मक व शिल्पकारी से संबंधित वस्तुएं, चित्रकारी, रेडिमेड वस्त्र व्यवसाय, कशीदाकारी, बागवानी, मॉडलिंग, टेलरिंग, फिल्म व्यवसाय, फैशन डिजाइनर, विज्ञापन एजेंसी, इत्र आदि से संबंधित कार्यों को व्यवसाय के रूप में चुनकर सक्रिय होते हैं। जीवन में विशेष उन्नति व सम्मान के अधिकारी बनते हैं। भूमि संबंधी कार्यों में सफलता मिलती है।

3

वृषभ - चारित्रिक विशेषताएं

वृषभ राशि के जातकों में निम्न चारित्रिक विशेषताएं पाई जाती हैं चरित्र के प्रारंभिक लक्षण- दुराग्रही, लालची, भौतिकवादी, इंद्रियार्थवादी, भौतिक इच्छाओं द्वारा नियंत्रित, अड़ियल, मोटी बुद्धि का, अनम्य, भूमिज, स्थिर चित्त का व्यक्ति। चरित्र के उत्तरकालीन लक्षण- दृढ़निश्चयी, दुराग्रही, अटल, बौद्धिक मूल्यों का विकास, सच्चे अंतर्निहित मूल्यों के साथ अनुकूलता, भौतिकवाद तथा भौतिकेतर चमक-दमक से विलग होना, भावनात्मक इच्छाओं को नियंत्रित करना, आधिपत्य को साधनों के अंत की बजाय अंत के साधन के रूप में देखना। अंतःकरण के लक्षण- इच्छाओं का आकांक्षाओं तथा आध्यात्मिक इच्छाओं में रूपांतरण, आध्यात्मिक मूल्यों के साथ अनुकूलता, माया की दुनिया का प्रबोधन, विश्व को ज्ञान के प्रकाश की ओर प्रेरित करना करने में सहायक, लोगों के मध्य होकर भी अलग-थलग रहना, दैविक कार्यों की प्रगति में स्वयं के संसाधनों का उपयोग, ईश्वरीय संसाधनों का प्रबंधक होना, स्वामित्व, क्षमताओं तथा भौतिक वस्तुओं का उचित उपयोग, आध्यात्मिक प्रबोधन द्वारा भौतिक बंधनों को तोड़ना, भौतिकेतर भ्रांतियों को समाप्त करना।

3A

वृषभ - विवाह और दांपत्य जीवन

विवाह के संबंध में वृषभ राशि वृश्चिक को अपनी ओर आकर्षित करती है। उसकी दृष्टि में वृश्चिक की ही प्रधानता रहती है। वैसे कन्या राशि से उसके संबंध रोमांटिक होते हैं, पर इस राशि से उसका रोमांस अस्थायी होता है। कन्या राशि प्रायः स्वयं संबंध तोड़ लेती है। वृषभ प्रेम के संबंध में गृहाभिमुखी होते हैं। वृषभ राशि का पुरुष प्रत्येक वस्तु के सर्वोत्तम रूप को पाना चाहता है। उसमें भोजन तथा सैक्स दोनों की भूख बहुत प्रबल होती है। वह पूर्ण आत्मसमर्पण चाहता है। पर्याप्त भोजन, पर्याप्त काम-तृप्ति, दोनों की ही उसे भरपूर आवश्यकता होती है। अपनी पत्नी की सैक्स के प्रति उदासीनता उसे क्रोध से भर देती है। उसका सैक्स व्यवहार बहुत कठोर होता है। सैक्स प्रिय पत्नी या प्रेमिका उसे बहुत प्रिय होती है और वह तब उसके लिए सबकुछ कर सकता है। वृषभ राशि वाले स्त्री-पुरुष दोनों ही सर्वोत्तम के आकांक्षी तथा भोजन एवं सैक्स दोनों के ही भूखे होते हैं। वैवाहिक जीवन में पति-पत्नी में अवश्य खटपट चलती रहती है, किन्तु फिर भी एक-दूसरे को छोड़ नहीं सकेंगे। खटपट के बाद पुनः मेल हो जाता है।4

4

वृषभ - प्रेम संबंध

वृषभ राशि वाले जातकों में प्रेम में क्षमता महान होती हैं। सैक्स के क्षेत्र में भी उसकी आकांक्षाएं विशाल होती हैं। वह उन व्यक्तियों की ओर आकर्षित होता है, जो उसकी सहायता कर उसे प्रसन्नता, सुख और सहयोग देते हैं। उसके लिए सबकुछ करने को प्रस्तुत रहता है। इस राशि का प्रेम बहुत तीव्रता से प्रारंभ होता है, पर उसका अंत मित्रता एवं समझदारी में ही होता है। यदि उसे ऐसा अनुभव हो कि उससे लाभ उठाकर छोड़ दिया गया है, उस समय वह आपे से बाहर हो सकता है। ऐसी स्थिति में वह अपने प्रेमी का कठोर आलोचक बन जाता है, फलस्वरूप उसके प्रिय से सदैव के लिए संबंध टूट जाते हैं। यह राशि ऐसा प्यार चाहती है कि जिसका आधार ठोस और दृढ़ हो। उस पर प्रेम तथा वासना दोनों का समान प्रभाव रहता है। दोनों भरपूर मात्रा में पाना चाहता है। वह एक से अधिक प्यार का इच्छुक रहता है। वृषभ राशि सैक्स पर नियंत्रण नहीं रख पाती है। समय-असमय का उसे ध्यान नहीं रहता है। वृषभ राशि वाले से बलपूर्वक कोई कुछ नहीं करा सकता है। पर विपरीत लिंग का व्यक्ति प्यार से कुछ भी करा सकता है। वृषभ राशि का व्यक्ति अपने सम्मान में सैक्स से अधिक संबंध रखता है। वृषभ राशि वाले व्यक्ति जीवन जटिलता से परिपूर्ण रहता है। वह अपने साथी को अपने अनुसार ढालने के लिए दृढ़ता से भी काम लेता है। इसमें रति-भावना मानसिक अधिक होती है, शारीरिक कम। वृषभ राशि अपने साथी के विषय में पूर्णतः आश्वस्त होना चाहती है। मत-विभिन्नता उसे स्वीकार नहीं होता। वृषभ राशि का व्यक्ति प्रायः खोने के लिए पाता है। असफलता पाने के लिए सफल होता है। प्रेम संबंधी उसके विचार व्यावहारिक तथा सतर्क होते हैं। यदि उसे उसके मनोनुकूल साथी मिल जाए, तो दोनों का जीवन भर साथ निभ जाता है। विपरीत लिंग से संबंध विपरीत लिंग के प्रति इस राशि वालों का दृष्टिकोण विश्लेषणात्मक होता है। कलात्मक प्रवृत्ति के लोगों को वह अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं। मधुर कंठ वाले का संग-साथ इस राशि को अच्छा लगता है। वह प्रसन्न होता है। स्त्री जाति अथवा अन्य किसी व्यसन में इनकी शीघ्र ही आसक्ति हो जाती है, किन्तु अपने चरित्र को हमेशा दर्पण के समान शुद्ध व स्वच्छ रखते हैं तथा संभालने का प्रयास करते रहते हैं। वृषभ राशि के व्यक्ति को सुख-चैन तथा शांति से रहना पसंद होता है। वे स्त्रियों की ओर सहसा आकर्षित नहीं होते हैं। अपने काम से काम रखते हैं तथा अपनी ओर से वे कभी किसी से भी बात नहीं करना चाहते। भौतिक रूप से वृषभ राशि वाला व्यक्ति कन्या राशि की ओर आकर्षित होता है, मीन तथा कन्या राशि के संबंध में उसे सुख मिलता है। वृषभ राशि के लिए सब प्रकार के गृहस्थ सुख आवश्यक हैं। अपने प्रेम-व्यवहार में कोई ठेस लगने अथवा भावनाओं को चोट पहुंचने की स्थिति में वह उग्र हो उठता है। कर्क और वृषभ राशि में पर्याप्त समानताएं होती हैं। दोनों ही धन तथा प्रेम के संबंध में व्यावहारिक होते हैं, पर वृषभ की अपेक्षा कर्क कुछ अधिक व्यवहार कुशल होता है।

5

वृषभ - रुचियाँ/शौक

वृषभ राशि वाले लोगों को ज्योतिष पुस्तकें पढ़ना, खेलकूद, अच्छी चीजों का संग्रह करना, नृत्य, गायन, कथा-कीर्तन, सत्संगति आदि में से किसी एक बातमें काफी दिलचस्पी रहती है। वृषभ राशि के पुरुष को खेलों का तथा वृषभ राशि की स्त्री को वस्त्रों का शौक रहता है। वृषभ राशि का मनुष्य विविध घटनाओं तथा स्थानों के वर्णन में रुचि लेता है।

6

वृषभ - स्वभावगत कमियां

वृषभ राशि वालों को डराना-धमकाना संकट को आमंत्रित करना है। क्रोध में आकर ये लोग सीमाओं को भी पार कर सकते हैं। स्वयं झगड़ालू नहीं होते हैं, पर यदि कोई उनसे स्वयं अटकता है तो उसे पर्याप्त दंड दिए बिना भी नहीं छोड़ते। वह तब गंभीर से गंभीर वार भी कर देते हैं। जिद्दी होते हैं। इस राशि वाले स्वभाव से अत्यंत आलसी होते हैं। वृषभ राशि के व्यक्ति अन्य व्यक्तियों की अपेक्षा कहीं अधिक रूढ़िवादी होते हैं। भोजन के मामले मेंें ये संयम नहीं रख पाते हैं, चटोरपन इसकी आदत होती है। वृषभ राशि में स्वयं को महान समझने की भावना होती है। दूसरे की सफलता को देखकर वह उसके स्थान पर अपनी कल्पना करना उसका स्वभाव बन जाता है। वह ईर्ष्या नहीं करता, पर स्वयं भी वैसी ही सफलता पाने के लिए लालायित हो उठता है। वह एक ओर जहां अत्यधिक सहनशील तथा सहानुभूति पूर्ण होता है, वहीं दूसरी ओर वह अपनी भावनाओं पर ठेस लगने के कारण अपने व्यवहार से भी पलट जाता है तथा रचनात्मक के स्थान पर उसका रोल ध्वंसात्मक हो जाता है। कमियों से बचने के उपाय हिन्दू पद्धति में वृषभ राशि के जातकों को कष्ट रहने पर संकष्टी चतुर्थी, प्रदोष, रामायण पाठ, गायत्री जप अथवा मंगलवार को उपवास करना चाहिए। शुक्रवार का व्रत एवं शिव उपासना भी शुभफलदायिनी है। सफेद वस्तुओं चावल, मिसरी, दूध, सफेद वस्त्र का दान से शुभ की प्राप्ति होती है। 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः शुक्राय नमः' - इस मंत्र का 16,000 जाप करना मनोकामना पूर्ति करने में सहायक है।

7

वृषभ - घर-परिवार

वृषभ राशि के लोग एक सफल माता-पिता बनते हैं। बच्चों के प्रति उनके मन में अत्यन्त प्रेम तथा समझदारी की भावना होती है। वृषभ राशि वाले व्यक्तियों को कन्या या संतान से सुख मिल पाता है। रिश्तेदारी से हमेशा दूर रहते हैं। वृषभ राशि के व्यक्ति वस्तुस्थिति को मधुर शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते हैं। स्वयं आराम पसंद होने के साथ-साथ अपने परिजनों को भी अपने आनंद में सहभागी बनाते हैं। इस राशि के लोग अपने परिवार तथा मित्रों के प्रति सदैव ईमानदार तथा सहायक होते हैं। घरेलू चिंताओं में उलझे रहना और उन्हीं पर सोचते रहना, उसके लिए कष्टदायी होता है। पारिवारिक जिम्मेदारियों से वह बहुत घबराता और दूर भागता है। पारिवारिक स्थितियां उसे बहुत परेशान करती हैं। परिवार के मुखिया के रूप में वह एक असफल व्यक्ति होता है। उसे अपनी संतान का भार उठाने में विशेष रुचि नहीं होती। घर गृहस्थी के कामों से वह अपने को अलग रखना ही पसंद करता है। वृषभ राशि का मनुष्य अपने आप में केंद्रित होकर अपने प्रियजनों को दुःखी बना देता है। उससे हर समय संपर्क स्थापित कर पाना संभव नहीं होता। वह प्रायः अपने आप में सिमट जाता है। एकान्तवासी या अचानक गंभीर हो उठना इस राशि के व्यक्ति की विशेषता है, पर इस स्थिति से मुक्त होने पर वह स्वयं को अधिक तुष्ट, सुखी एवं शक्तिशाली अनुभव करने लगता है।