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कतरा  कतरा  जिंदगी पिघल रही है ,
आसू बनकर निकल रही है |

चाहाथा दूर से हि देखू तुझे ,

रोशनी आखोकी बुझ रही है |


चाहत थी आवाज तरी सूनु ,

पर कानोकी हालत बुरी है |


कैसे पुछू 'क्या मुझसे प्यार करती हो ? '

जुबा साथ नही देती ,लडखडा रही है |


क्या तुम दिल हि दिल मे सुनोगी ?,

मेरे दिल मे तो तू हि तू रहाती है |


गुजर गई उम्र ,तेरी 'हा ' के इंतजार मे ,

फिर भी उम्मीद है |


क्यू के दिल मेरा पागल है ,

कतरा कतरा जिंदगी पिघल रही है |





------सुरेश कुलकर्णी