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वह बहुत करीब हैं दिल के फिर भी न जाने क्यों

बहुत दूर दूर से लगते हैं ,

ये अहसासों के दिये भी अब बुझ रहे से लगते हैं !

कभी रोशन हुआ करते थे सितारे भी खुले आसमान में ,

अब सितारे भी न जाने क्यों बुझे बुझे से लगते हैं !

अब न वह गुलशन रहा न वह चांदनी रही ,

बस एक तेरी यादों के सहारे हम टिमटिमाते से लगते हैं !!