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जीवन तूफानों से भरा क्यों न हो और तुम्हें तुम्हारे अपने ही दगा क्यों न  दे रहे हो, तो भी हिम्मत न हारना, उम्मीद का अलख जगाए रखना I ईश्वर भी आखिर  कब तक आपकी परीक्षा लेगा I तुम्हारी जिद्द और हौसले को देख वो भी  कभी न कभी झुकने पर विवश हो ही जाएगा I और रही बात अपनों के द्वारा छले जाने की , यह तो जीवन का अहम हिस्सा है अगर वे हमारे जीवन में न होंगे तो हमें आगे बढ़ने का हौसला तथा कुछ पाने की लालसा कैसे जाग्रत होगी I बिना कुछ पाने की लालसा के निरंतर अपने कर्मो को करते जाओI  सही वक्त एवं अवसर का इंतजार करने में ही बुद्धिमत्ता है I इक़बाल की पंक्ति याद आती हैं : 

          खुद ही को कर बुलंद इतना की ..........I