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राधा माँ

राधा को अक्सर राधिका भी कहा जाता है, हिन्दू धर्म में विशेषकर वैष्णव सम्प्रदाय में प्रमुख देवी हैं। वह कृष्ण की प्रेमिका और संगी के रूप में चित्रित की जाती हैं।

वैष्णव सम्प्रदाय में राधाको भगवान कृष्ण की शक्ति स्वरूपा भी माना जाता है , जो स्त्री रूप मे प्रभु के लीलाओं मे प्रकट होती हैं |
राधा में ‘रा’ धातु के बहुत से अर्थ होते हैं. देवी भागवत में इसके बारे में लिखा है कि जिससे समस्त कामनायें, कृष्ण को पाने की कामना तक भी, सिद्ध होती हैं.  सामरस उपनिषद में वर्णन आया है कि राधा नाम क्यों पड़ा ?

राधा के एक मात्र शब्द से जाने कितने जन्मो के पाप नष्ट हो जाते है
र शब्द का अर्थ है = जन्म-जन्मान्तर के पापो का नाश
अ वर्ण का अर्थ है =मृत्यु, गर्भावास,आयु हानि से छुटकारा
ध वर्ण का अर्थ है =श्याम से मिलन
अ वर्ण का अर्थ है =सभी वन्धनो से छुटकारा

श्रीराधा के परिवार का परिचय

पितामह (दादा)–महीभानु
पितामही (दादी)–सुखदा
पिता–वृषभानु
माता–कीर्तिदा
भाई–श्रीदाम
छोटी बहिन–अनंगमंजरी
चाचा–भानु, रत्नभानु एवं सुभानु
बुआ–भानुमुद्रा
नाना–इन्दु
नानी–मुखरा
मामा–भद्रकीर्ति, महाकीर्ति, चन्द्रकीर्ति
मौसी–कीर्तिमती
कुल-उपास्य देव–श्रीराधारानी के कुलदेवता भगवान सूर्यदेव हैं।

श्रीराधा के प्रिय आभूषणों के नाम

तिलक–स्मरयन्त्र
हार–हरिमनोहर
नाक की बुलाक–प्रभाकरी
कड़े की जोड़ी (कड़ूला)–चटकाराव
बाजूबंद–मणिकर्बुर
अंगूठी–विपक्षमर्दिनी इस पर ‘श्रीराधा’ नाम गुदा है।
रत्नताटंक जोड़ी–रोचन
करधनी (कमरपेटी)–कांचनचित्रांगी
नूपुर–रत्नगोपुर (इनकी मधुर झंकार ही श्रीकृष्ण का मन मोह लेती थी)
मणि–सौभाग्यमणि (यह मणि सूर्य और चन्द्र दोनों के समान कान्तियुक्त थी। इसका नाम स्यमन्तकमणि भी है)
वस्त्र–श्रीराधा को दो वस्त्र अत्यन्त प्रिय थे। १. मेघाम्बर–मेघ की कान्ति के समान यह वस्त्र श्रीराधा को अत्यन्त प्रिय है। २. कुरुविन्दनिभ–श्रीराधा का लाल रंग का यह वस्त्र श्रीकृष्ण को अत्यन्त प्रिय है।
दर्पण–मणिबान्धव
कंघी–स्वस्तिदा
सुवर्णशलाका (काजल लगाने के लिए सोने की सलाई)–नर्मदा
श्रीराधा को प्रिय सोनजूही का पेड़–तडिद्वल्ली
राग–श्रीराधा के प्रिय राग मल्हार व धनाश्री हैं।
वीणा–श्रीराधा की रुद्रवीणा का नाम मधुमती है।
नृत्य–श्रीराधा के प्रिय नृत्य का नाम छालिक्य है।
कुण्ड–श्रीराधाकुण्ड

श्रीराधा की प्रिय गायों के नाम

सुनन्दा, यमुना, बहुला आदि श्रीराधा की प्रिय गाय हैं।
प्रिय हिरनी–रंगिणी
प्रिय चकोरी–चारुचंद्रिका
प्रिय हंसिनी–तुण्डीकेरी
प्रिय मैना–शुभा और सूक्ष्मधी
प्रिय मयूरी–तुण्डिका