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Be a bit sensitive——

आजकल ना जाने क्यूँ मन बहुत
दुविधा में है ,कैसे हैं हम लोग एक तरफ़ तो इतनी बड़ी बड़ी बातें करते हैं पर ख़ुद को ज़रा भी बदलने की कोशिश नहीं करते। वही छोटी छोटी बातें अपनी ego , हम ही हम हैं  वाली attitude, fake high profile दिखने की कोशिश , ख़ुद की originality में प्राइड लेने के बजाय कुछ और ही दिखने की चाह आजकल की new rich क्लास की आदत बन गई है।
देहरादून में ये कल्चर कुछ ज़्यादा ही दिखता है, यहाँ की society के खुलेपन को positively लेने की बजाय उसका ग़लत फ़ायदा उठाना और इस तरह ग़लत projection,unfortunately कुछ हमारे नए लोगों की आदत बन गया है , खासकर जो बाहर से आकर यहाँ अब रह रहे हैं.
कड़वा है दोस्तों पर सच है। westernisation को modernisation से confuse कर देना हमारा पुराना स्वाभाव है । क्या सिखा रहे हैं हम अपने बच्चों को , उनका right aur wrong का सेन्स हम ही ख़त्म कर रहे हैं।
School के आगे गाड़ी ठीक से पार्क ना कर पाने वाले parents किस मुँह से कहते होंगे अपने बच्चों को की बेटा आप ये ग़लत कर रहे हो !!!और ये तो सिर्फ़ एक इग्ज़ाम्पल है, ढेरों ऐसे उदाहरण मिल जाएँगे ।और फिर आप उकताने लगेंगे लोगों से, उनकी नक़ली बातों से, उनके insensitive ऐटिटूड से ।

हमारे पुराने लोगों को देखो , कैसे वो आज भी अपनी दोस्ती और रिश्तों को एक level के साथ निभाते हैं ।
ज़िंदगी को आप पूरे खुलेपन से जी सकते हैं , अपनी शर्तों पे, मैं जीती हूँ, जो सही लगता है करती हूँ ।
बस ज़रूरत है की साथ ही हम अपनी ज़िम्मेदारी थोड़ी सी अपने आसपास भी निभाएँ।
सोचें जो बात आप अपने लिए बर्दाश्त नहीं कर सकते वही बात आप दूसरों के लिए कैसे कह सकते हैं !!कैसे सुन सकते हैं ।!!
शायद आप में से अधिकतर इन बातों को उड़ा दें , अच्छा ,बड़ी बनती है ख़ुद को !!!!!भी कह दें,
But you all beautiful people ,,deep down your heart, आप जानते हैं मैंने जो लिखा वो सच है ।
आप बहुत सुंदर हैं जैसे हैं , इस originality को किसी बनावटी मुखौटे की ज़रूरत नहीं।
Be sensitive,,
Be Yourself......

-Meenu