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चाय वाली मोहब्बत...

मेरी चाहत चाय जैसी, और वो पागल , कॉफ़ी की दीवानी..!
चाय और कॉफ़ी की पसंद में कुछ उलझ-सा गया हूँ मैं,
कभी सोचता हूँ कि तुम्हारी उस कॉफ़ी से दिल लगा लूँ.. कभी कभी लगता है नही, सुकून तो सिर्फ चाय में ही बसता है..! आया है कॉफ़ी पर दिल उसका ,वो होगी उसकी जान.., चाय है वजूद मेरा.. और यही मेरी पहचान..!
वो CCD में cappuccino पीनेवाली.. मैं ठहरा चाय के टपरी पर अपना अड्डा जमानेवाला..!
मुझे चांदनी रात में चाय भांति.., उसे सुबह की किरणों संग कॉफ़ी की ताज़गी..! मैं उसके खुले बालों का आशिक़, वो लहराती चोटी की दीवानी..
उसे eyeliner पसंद था..मुझे उसका अँखियों पर काजल लगाना..
वो समंदर की दीवानी , मैं पहाड़ो का दीवाना..
उसे पसंद है long drive..और मुझे हाथों में हाथ डाले लंबी वॉक..!
उसकी पसंद है Badshah के गाने..
मुझे भांति गुलज़ार सहाब की गज़ले..
मैं ठहरा दिया बनकर प्रकाश देने वाला, वो है मोमबत्ती, खुद जलकर दुसरो को उजाला देने वाली..!
वो कड़क मिज़ाज, साँवली, तीखी तासीर, बिलकुल मेरी चाय जैसी , मैं पागल कभी मीठा कभी कड़वा , अफनाता उसकी कॉफ़ी की तरह...
तुम ही बताओ चाय और कॉफ़ी का कोई ताल मेल हो सकता है क्या..?
की चाय भी न छूटे और कॉफ़ी भी साथ बनी रहे..!