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ब्रिक्स सम्मेलनः (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका)”
“व्यंग “

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चलो ,कवि सम्मेलन सम्पन्य हुआ ! यह हमारा सौभाग्य था कि विश्व के महान कवियों का हमने सम्मान अपने धरती पर किया ! हमने सोच रखा था कि गोवा की हसीन वादिओं में उनकी कवितायें और निखरेंगी पर हमें ही अधिक कविता पाठ करना पड़ा ! ब्राजीलियन और दक्षिण
अफ्रीका के कवि मायूस नजर आ रहे थे ! वे लोग अपनी कविता संग्रह ही भूल कर आ गए थे !
रूस और चीन के कविओं की भी कविताएँ पाकिस्तान से छपके आने वाली थीं पर दुर्भाग्यवश उसे लाइन ऑफ़ कण्ट्रोल पर ही रोक दिया गया ! अब तो सारा बोझ हमारे कंधे पर आ गया ! चुन -चुनकर वीररस आतंकवादी का राग अलापना पड़ा ! और उन्हें कवि सम्मेलन में बैठना पड़ा ! भारतीय पत्रकारों और टेलीविज़न मीडिया ने जब ब्राज़ील, रूस, , चीन और दक्षिण अफ्रीका के कविओं से पूछा ‘ आतंक रस की कविता कैसी लगी?’ तो उनका कहना था ‘इस घिसीपिटी कविताओं से हमें क्या ….हम तो अपना व्यापार करने आये थे ….कविता पाठ तो एक बहाना था !!
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डॉ लक्ष्मण झा"परिमल "
दुमका