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तकलीफ़ोंकेगलियारेसेगुजरजरूररहेहैंलेकिनअपनोंकेसाथअपनापनमहसूसकररहेहैं।सभीजोवक्तकेहाथोंकठपुतलीबनचुकेथे।आजखुदकीतालपरथिरकरहेहैं।प्रदूषण,कोलाहल,जिंदगीकीभागदौड़तोमानोगर्मतवेपरपड़ेपानीकीतरहभापबनकरउड़चुकीहैं।आजसभीघरमेंरहकरनया-नयाकरनेकीपहलकररहेहैं

सिर्फप्रकृतिसेअपितुमानवजीवनसेभीकोहराहटगयाहै,धुंधछटगईहै।मनमंथनकेलिएसभीकोपर्याप्तसमयमिलाहै।घरमेंरहकरसिर्फघरकेप्रतिजागरूकहुएहैं।अपितुप्रकृतिकीओरभीखींचेजारहेहैं।सात्विकजीवनअपनारहेहैं।प्रदूषण,ट्रैफिककीसमस्याघरसेहीकार्यालयकेकार्यभीसुचारूरूपसेहोरहेहैं।कार्यक्षमतामेंभीबढावाहुआहै

जीवनकोनयाआयाममिलाहै।प्राथमिकताएंबदलीहैंलेकिनवैक्सीनबनजानेकेबादजबकोरोनावायरसकेआतंककाअस्तहोजाएगातबकहींहमइसअच्छेबदलावकोहाशिएमेंडालकरफिरवहीपुरानीतनावयुक्तदिनचर्याअपनालें

नगाड़ेकीतरहबर्तावकरनेलगेंजिसपरकितनाभीमारोउसकाअपनाहीसंगीतनिकलताहै।लेकिनहमसबजानतेहैंउम्मीदोंपरदुनियाटिकीहै।अतःविश्वासहैकि,लाॅकडाउनकेदौरानहमारेजीवनमेंजोनयाउजासआयाहैवहयकीननबनारहेगाऔरहमाराहरकदमउन्नतिकीओरतोबढ़ेगालेकिनअबउसमेंप्रकृतिकीअवनतिनहींछुपीहोगी