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शहीद जिनका इंतज़ार कभी ख़त्म नही होगा, फिर भी इंतज़ार करते  है, और कुछ यूँ सोचते है,

राहें तो क़ई,
पर तुझ तक ले जाए वो कहीं नही!

वादे तो क़ई,
पर तेरे साथ ला सके वो कहीं नहीं।

बातें तो क़ई,
पर तुझसे कह सकूँ वो कहीं नहीं।

यादें तो क़ई,
तुझे भूला दूँ वैसी कोई नही!

चेहरे तो क़ई,
हाथो में जिसकी तस्वीर है बस वो नही!