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वैसे  तो करोना का महाकाल सब तरह की गतिविधियों पर एक फुल स्टॉप  लगाकर चल रहा है, फिर भी घुमक्कड़  मन को कैसे समझाते, तो थोड़ा सा ज्यादा एहतियात बरतते हुए हमने सोचा हर साल की तरह इस साल भी नए साल का स्वागत किसी नए शहर से किया जाए।
बातचीत की , रास्ते के बारे में जानकारी ली और हमने यह डिसाइड किया था कि हम ट्रेन या प्लेन से नहीं जाएंगे क्योंकि उसमें खतरा थोड़ा ज्यादा है। रोड ट्रिप में क्योंकि आप अपनी पर्सनल कार में होते हैं तो आप hygeine और अन्य चीजों के बारे में ज्यादा अच्छे से एहतियात बरत सकते हैं ।
किसान आंदोलन के चलते जयपुर तक के रास्ते के बारे में थोड़ा सा अंदेशा था जिसे एक ट्रैवल एजेंसी वाले  से बात करके हमने दूर किया और पलवल के रास्ते से होते हुए हम जयपुर पहुंचे। पहली रात वहां halt किया। जयपुर से सुबह नाश्ता करके अगले दिन शाम तक उदयपुर पहुंचे। होटल लिया जरा सा शहर से हट के। कारण दो थे, एक कारण यह था कि नववर्ष की वजह से बहुत भीड़ थी और हमें जल्दी से अच्छी बुकिंग मन मुताबिक नहीं मिल पा रही थी ।दूसरा कारण यह था कि कोरोना के चलते हल्का सा भीड़भाड़ को अवॉइड करना चाह रहे थे ।सज्जनगढ़ दुर्ग के पास हमने डिसाइड किया कि हम 5 दिन इसी एक होटल में रहेंगे और आराम से बिना किसी जल्दबाजी के टूरिस्ट स्पॉट को आराम आराम से देखेंगे। थोड़ा सा आसपास के इलाके का आनंद लेंगे और साथ ही आनंद लेंगे सज्जनगढ़ दुर्ग का जो  हमारे कमरे की खिड़की के सामने है और नाश्ता करते दुर्ग और उस पहाड़ी की छाया में बैठने का आनंद कुछ और ही है।
आज  मैं उदयपुर और उसके टूरिस्ट स्थानों के बारे में बहुत ज्यादा बात नहीं करूंगी काफी मशहूर शहर है काफी जानकारी आपको आसानी से सब जगह उपलब्ध है।
बात करूंगी कुछ उन बातों के बारे में जो शायद हर किसी को नहीं पता ।
आप किसी भी टूरिस्ट स्पॉट पर आनंद लें लेकिन कोशिश करें कि एक जगह इकट्ठा ना हो कोरोना की महामारी से बचने का एक ही उपाय है थोड़ा सा हम अलग हो  और मास्क के बारे में मैंने एक बार फिर देखा लोग बहुत ज्यादा लापरवाही बरत रहे थे ।हम लोगों के मास्क हमारे बिल्कुल साथ थे सिर्फ फोटो खिंचवाने के समय वह नीचे हुए अन्यथा  हमेशा हमारे चेहरों पर लगे हुए थे। फोटो के समय भी हमने शांति से इंतजार किया उस स्पॉट के खाली होने का ताकि हम अपने मन मुताबिक वहां एक फोटो खिंचवा सकें भीड़ का हिस्सा बने बगैर ।
उदयपुर आने वालों के लिए एक जानकारी मैं यहां साझा करना चाहूंगी खासतौर से कुंभलगढ़ किले के बारे में ।वैसे तो यहां हर टूरिस्ट स्पॉट पर इस बार मैंने देखा कि टिकट का जो पैसा था वह काफी बढ़ गया है। लेकिन खासतौर पर कुंभलगढ़ के लिए एक छोटी सी परेशानी का सामना करना पड़ा  जो  वैसे तो सुविधा है और वह आने वाले दिनों में मेरे ख्याल से और भी जगहों पर आपको देखने को मिलेगी। ऐसे कई लोग हैं जो तकनीकी माध्यमों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रखते हैं यह जानकारी उन्ही दोस्तों के लिए है। कुंभलगढ़ के लिए खास तौर पर आपको नकद राशि देकर टिकट की प्राप्ति नहीं होगी। कुंभलगढ़ किला यहां से बहुत दूर है करीब 100 किलोमीटर दूर है।
कुंभलगढ़ के लिए  आप को  ऑनलाइन बुकिंग करनी होती है ।वही टिकट खिड़की पर एक Q R-code दिया हुआ है उसे आप स्कैन करें और सरकारी वेबसाइट पर आप जाएंगे वहां पर अपने नाम और अपने बच्चों के नाम और आईडी नंबर आपको डालने होंगे तब जाकर आप वह टिकट जनरेट कर पाएंगे। इसके लिए आपके पास पे यू मनी नाम का एप या पेटीएम एप होना जरूरी है या आप अपना क्रेडिट या डेबिट कार्ड भी इस्तेमाल कर सकते हैं। खास बात यह है कि आपके जेब में एक आपका आईडी होना चाहिए और आपके फोन में अच्छा सिग्नल होना चाहिए तभी आप वहां पर टिकट जनरेट कर पाएंगे और उसी टिकट को मोबाइल में दिखाकर आप प्रवेश कर पाएंगे।
बाकी यहां लेक पिछोला अभी हम गए नहीं है। फतेह सागर लेक लेक पिछोला से थोड़ा कम भीड़भाड़ वाला इलाका है ।मोती मगरी नाम का एक गार्डन किनारे बसा हुआ है और उसके किनारे पर lake साथ सड़क पर घूमने का शाम के समय आनंद ही कुछ और होता है। यहां दो तरह की बोट चलती है एक स्पीड बोट जिसमें आप एक बार में 4 या अधिकतम 6 लोग बैठ कर जा सकते हैं हमने उसी का ऑप्शन दिया था कारण स्पष्ट है भीड़ से बचने के लिए। और दूसरा है एक बड़ी boat जिसमें एक बार में करीब 20 से 25 लोग बैठ सकते हैं जो थोड़ा ज्यादा समय लेती है ।
बात करें सिटी पैलेस की  तो  वहां आपको  पैलेस के अंदर ही वह घाट मिलेगा जहां से आपको जग मंदिर जाने के लिए boat मिल सकती है। अच्छी बात यह थी कि हर बार जब भी उन्होंने हमें लाइफ जैकेट्स दिए उन्हें sanitize  कर रहे थे ।
यहां पर एक बात और बताना है,  खासतौर से अगर अपनी गाड़ी से सफर कर रहे हैं, तो सबसे आसान तरीका है कि आप यहां चेतक सर्कल नाम का चौराहा है वहां से एक मोड़ मुड़ के सीधे आप सिटी महल पैलेस के घाट वाला गेट है वहां  पहुंच सकते हैं और वहां पर बड़ी सी पार्किंग बना रखी है या विंटेज कार म्यूजियम उसके बगल में ही है वहां पर भी अपनी सुविधा पूर्वक car park कर सकते हैं। इस तरह से आप गाइड और ऑटो वालों की चालाकी से थोड़ा सा बचा सकते हैं। 3:00 बजे के बाद अगर आप जगमंदीर  जाते हैं तो पर व्यक्ति टिकट का पैसा डबल हो जाता है कारण शायद शाम का लाइट एंड साउंड शो है और अगर आप 2:00 बजे तक लेते हैं तो आपको आराम से भ्रमण का फायदा मिलता है ।
vintage car museum में आप अपने आपको पुराने जमाने में भी जाता  महसूस कर सकते हैं ।फोर्ड ,मर्सिडीज, रोल्स रॉयस के इतिहास के बारे में वहां हमें जो म्यूजियम का ही अपना एक गाइड था उसने बड़े विस्तार से बताया ,बड़े प्रेम से हमें वहां का राउंड दिया। चाहे तो वहां पर ₹300 में वेजिटेरियन थाली भी खा सकते हैं। यहां पर आने वाले ज्यादातर टूरिस्ट्स को यह अंदेशा रहता है कि लेक पिछोला पर शायद hotels का रेट ज्यादा है ऐसा कुछ नहीं देखने को मिला ।शायद कोरोना की वजह से । और आजकल यहां पर क्योंकि नाईट कर्फ्यू टाइप का लग जाता है तो हमने opt  किया कि हम अपने होटल में डिनर अपने breakfast के साथ इंक्लूड कराएं जो हम काफी reasonable पड़ता है साथ ही रात के खाने की उलझन से मुक्ति।
तो अंत में बस इतना ही दोस्तो की corona काल में घूमें पर एहतियात से, ताकि घर जाएं सुनहरी यादों के साथ, ना कि बीमारी के साथ।
Happy wanderings