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"जिंदगी" कहने के लिए बस कुछ शब्द ही तो है पर इसे जितना समझने और जानने की कोशिश करो उतनी ही पहेली सी लगती है...

रोज सुबह अपने साथ कई सारे सवाल लेकर आती कभी कुछ सवालों के जवाब मिलते हैं तो कभी कुछ सवालों के जवाब नही भी मिलते हैं ..

कभी कभी ढेर सारी शिकवा -शिकायत होती है इससे फिर सोचती हूँ क्या ?फायदा शिकायत करने से जो है वो बुरा नही है और इससे बेहतर कुछ हो भी नही सकता ....बस यही सोचकर अपनी उलझने ,शिकायतें और कश्म -कश से भरी जिंदगी की तमाम परेशानियों से कुछ पल के लिए ही सही राहत सी मिल जाती है....