Image

वह एक फूल ही तो था , छोटे-छोटे
नन्हे-नन्हे हाथ थे उसके ठुमक-ठुमक
कर चलता था , तोतली भाषा बोलता
था , कितना प्यारा था गोल मटोल सा ,
अभी 3 साल का ही तो हुआ था ! गरीब
मां बाप का वही तो एक लाडला था !
प्यार से उसको कृष्णा बुलाते थे उसके
माँ बाप , आवाज लगाते ही अपने
नन्हे-नन्हे कदमों से दौड़ा चला आता
था ! और आकर अपनी माँ के सीने से
लिपट जाता था ! यूँ ही वक्त गुजरता
रहा , गरीब माँ बाप का फूल सा बेटा
धीरे-धीरे बढ़ता रहा , कब वह 11 साल
का हुआ पता ही ना लगा , सरकारी
स्कूल में पढ़ता था , और अपने ही
बचपन में मगन रहता था , इसी दौरान
गरीबी और लाचारी के कारण बीमार
हुए पिता को इलाज के लिए सरकारी
अस्पताल में दम तोड़ना पड़ा ! यहीं से
बदल गई उस नन्हे से फूल की किस्मत ,
भूख और लाचारी के कारण हाथ में
मजदूरी का लोहा पकड़ना पड़ा ! और
बाकी सभी फूलों की तरह इस फूल को
भी पत्थर का बनना पड़ा !!