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ज़िंदगी भी अजीबोगरीब है, न जाने कब कहा और क्यों?? बहुत कुछ नया सिखाती है

राहों पे चलते चलते दोड़तें दोड़तें हर एक मोड़ पर नया आयाम दे जाती है

जो आज सच लगता है कल शायद झूठ दिखे अथवा विपरीत

आज जो विचार किसी विषय को लेके है वो जरुरी नहीं कल भी वेसे ही रहे

असल में अगर इस पहलु पर गौर फ़रमाया जाये तो एक अजीब परन्तु कटु सत्य प्रकट होता है की

ज़िन्दगी है ही ऐसी यह समान नहीं हो सकती

अथा॓त बदलाव निश्चित है और बदलाव के साथ अपने विचारो,सिधान्तो को बदल लेना है चातुर्यता

जैसे जाे आज है वो कल नहीं हो सकता तो वेसे ही कल के विचार आज के लिए उपयुक्त कैसे?????