Image

उसकी मम्मी बहुत ख्याल रखती थी लेकिन बोबो इस बात से परेशान थी 14 साल की हो गई थी अब उसका अपना दोस्ती का दायरा बढ रहा था व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर . उसकी सबसे बडी परेशानी ये थी के अब तलक उसके parents ने उसे अपना mobile USE करने को नही दिया था इतनी छटपटाहट थी उसके अंदर इस बात को लेकर . उसका सबसे करीबी क्लास फेलो मयंक उसे अपना IPHONE जब इस्तेमाल करने को देता था तब उसकी बेचेनी और भी ज्यादा उंचे स्तर पर चली जाती थी . उसे इतना गुस्सा आता था कि वो कौन से parents के यहां पैदा हो गई , मयंक जैसे parents उसे क्यू नही मिले गाडी में आता है कॅन्टीन में अपनी मर्जी का खाना खाता है , मह्गा phone है मेहंगे STYLE वाले कपडे पह्न्ता है , मतलब उसकी शान ही अलग है वैसे तो मयंक जैसे कई बच्चे हैं उसकी क्लास में  लेकिन चुकी मयंक उसका फ्रेंड है तो उसके बारे में उसकी जानकारी ध्यान ज्यादा ही रहता है , उसके पास एक BIKE भी है वो कभी 2 BIKE से भी आता है , तब उसे भी BIKE चलाना सिखा देता है , उसके विचार फिर अपनी मजबुरी पे आ भटके . mobile तो आजकल बहुत जरुरी है ना ? लेकिन मेरे parents न जाने कौन सी सोच के बने हैं उनका कहना है COLLEGE में आजाओगी  तब तक समझ भी आ जायेगी फिर ले देंगे . हे राम क्या करू . मुझे अपने कमरे को अंदर से बंद भी नही करने देते बीच 2 में चेक करते रहते बहाने से . कभी कुछ, कभी कुछ बहाना. मै तो तंग आ गई हुं ..........

वैसे मेरा whatsapp and facebook account बना हुआ है , मयंक ने बना दिया था हम स्पोर्ट्स / लंच time में अपने 2 दोस्तो से खूब गप्प मारते है , मम्मी पापा को इस बारे में मैने कुछ नही बताया ,  लेकिन सब बेकार mobile तो है नही ना - हे राम .....

मेरा एक सवाल है सब से क्या parents का इतना ओवर प्रो तेक्टीव होना बच्चो की मानसिकता के लिये विकास के लिये हानिकारक नही है क्या ? pls जवाव जरूर देना pls ओके BYE - आपकी नन्ही  दोस्त  दोस्त बोबो .......