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जिंदगी में पहली बार मुझे बहुत घबराहट है, व्याकुलता है ( सिर्फ अपने लिए नहीं , सब के लिए। जब कई fone आए दवा के इंतजाम को लेकर तो ऐसा होना लाजमी है, ) बीमारी से डर नहीं , डर है तो इस बात से कि दवाई नहीं ,ऑक्सीजन नहीं ,कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं, और लोग जागरूक होने को तैयार नहीं । करोना अगर हवा से फैल रहा है तो  यकीनन बहुत बचाव  तो नहीं है लेकिन मास्क स्थिति को भयावह होने से बचा सकता है ।
जहां देखती हूं लोगों की मजबूरी नजर आती है कमाने की मजबूरी है घर चलाने की मजबूरी है इसलिए निकलना है घर से ।
समझ से बाहर है कि अपनी और किसी और की मदद कैसे की जाए।
कड़वा है,  बहुत कड़वा है पर सच है। भारत को विश्व के ज्यादातर देशों में बैन कर दिया फ्लाइट्स बंद है। For eg - यदि मुझे कुछ होता है तो मेरे पति आ नही सकते क्योंकि कोई फ्लाइट नही है। और कई परिवार इसी तरह की दुविधा में हैं, कई मां बाप जो यहां है अकेले और उनके बच्चे बाहर।
जरूरत है सरकार को और ज्यादा जिम्मेदारी और समझदारी के साथ ऐसे कदम उठाने की जो जनता के हित में हो, मानवता के हित में हो। और जल्दी। Get the best of minds and advice.
दुखद के अब भी ब्लेम गेम चल रहा है। गंभीरता ना चेहरों में दिख रही है ना शब्दों में और ना एक्शन में ,यह है सबसे दुखद।
जिंदगी की जैसे कोई कीमत ही नहीं रह गई। कल से अब तक बहुत करीबी लोगों के बहुत सीरियस होने के समाचारों ने सच,  कहीं झिंझोड़ दिया। लोग अंधाधुंध ramdesivir के पीछे भाग रहे, ऐसा कैसे है की अस्पतालों में अगर आप एडमिट हैं और वो आपकी लाइफ सेविंग मेडिसिन नही उपलब्ध करा रहे ??? एक दवा जो खुली नही बिक सकती , मरीज कैसे उसे लाएगा ???
कोई तर्क, कोई विचार काम ही नहीं कर पा रहा।
स्थिति पे कंट्रोल मुमकिन है, दवाइयों की सुचारू व्यवस्था, और ये आम आदमी नही कर सकता , ये तो सरकार को ही करना होगा।
आम आदमी की अपनी बहुत मजबूरियां हैं, उनके सर पे तलवार लटकाना बंद किया जाए ,
लेकिन साथियों इसका मतलब ये नही की हम लापरवाह हो जाएं, अपनी सुरक्षा की खातिर अगर ज़रूरत नही तो मत निकलो, मास्क up रखो, क्योंकि आपकी परवाह और कोई तो कर ही नही रहा।

नोट :
ये पूर्णतया non political post है।  ना मैं बीजेपी की खिलाफत कर रही हूं ना कांग्रेस या आप का सपोर्ट। मेरी शिकायत "इस समय" की सरकार की नीतियों और कदम से है।  बाबा रामदेव इंसान अच्छे होंगे पर वो भूल गए की इंसान एक या दो ट्रेड में ही मास्टर हो सकता है , हर चीज में नहीं।
कांग्रेस के समय भी कई महामारियां आई थी कई बार वो भी फेल हुए। Dr Manmohan is a great mind, respect, but unfortunately अपने समय में वो मौनी बाबा ही बन के रह गए।
एक उत्तम दिमाग तब तक किसी काम का नही जब तक वो उसको धरातल पे ना उतार सके। इस समय हालांकि उनसे  या और कुछ लोगो से राय/ सलाह  ले सकते हैं।
फिलहाल सरकार का पूरा ध्यान, मेडिसिन प्रोक्योरमेंट पे होना चाहिए, ना तेरा न मेरा, ये हम सब का है, कठिन समय भी और सुख भरी उपलब्धि भी।
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