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सिक्के अब चलते नहीं जमाना नोटों का है फिर भी
कटोरे में आज सिक्के डालते हैं लोग !
और चन्द सिक्कों के बदले नोटों की दुआ माँगते हैं
लोग !!
बैठा मंदिर के द्वार पर जिसे लोग समझे हैं भिखारी !
दरअसल वही तो है खोटे सिक्कों का व्यापारी !!
लेकर सब बलायें तुम्हारी सिक्कों के रूप में !
बांटता वह अपनी दुआओं की दौलत सारी !!
और खुद रहता जिन्दगी भर भिखारी का भिखारी !
क्यों की वह तो ठहरा खोटे सिक्कों का व्यापारी  !!