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जमाना अड़ कर खड़ा हुआ सदा प्यार की राहो में
तू छोड़ न देना साथ मेरा आकर उनकी बातो में
उल्फत भरी राहो में हाथ न मेरा छोड़ देना
जमाने ने अपने गुरूर में बहुत प्यार दफनाए है
जलाए है, कुचले है और नामो निशान मिटाए है
तू डर कर इनकी करनी से मुँह न मुझसे मोड़ लेना
भटकती राहो में तू गुम न हो जाना
आंधी-तूफान और पर्वत से भी मैं लड़ जाऊँगी
गर छोड़ दिया तूने दामन फिर न मैं जी पाऊँगी
जीवन-मरण अब सब मेरा मैने तेरे हाथो सौंपा है
मर्ज़ी तेरी अब कहाँ मुझे ले जाना है
मैने तो संग तेरे अब पग-पग पर चलना है
वादा है मेरा तुझसे चाहे मुश्किल हो जितनी डगर
अकेला न खुद को कभी पाओगे मगर
रंग में अब तो मुझको तेरे ही रंगना है
साथ तेरे अब उम्रभर मुझको चलना है
फना खुद को अब मुहब्बत में तेरी करना है
वादे किए जो तुझसे उन्हे मर कर भी निभाएंगे
डर-डर कर इस जमाने से अब न हम जीएंगे
जाते-जाते भी दुनिया से, मोहब्बत का नाम अमर कर जाएँगे
आग के इस दरिया में डूब कर भी हम जी जाएँगे
दास्ताने मोहब्बत एक खूबसूरत सी लिखेंगे
पैगामें मोहब्बत जमाने पर लिखेंगे
मोहब्बत, मोहब्बत बस मोहब्बत करेंगे