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कितना अच्छा होता कि जो लोग महसूस करते हैं वैसा हकीकत होता लेकिन अजीब है यह दुनिया लोग को शतरंज के सिपाही की तरह इस्तेमाल करते हैं खुद राजा बन जाते हैं एवं अपने राज्य के एक वफादार सिपाही का बड़ी विनम्रता से शोषण करते है..!
लेकिन हसरत और शौहरत कमाने के जोश में वफादारी का गला घोट देते है जवान और जमाने में बस इतना फर्क है कि एक अपनी स्वामी भक्ति के लिए खुद को शहीद कर देता है और जमाना वह है जो उसको मुर्दा बनाने के लिए किसी हद तक षड्यंत्र कर सकता है ।
आसमान की तरफ देखो तो पता चलता है बादल इसलिए बेचैन है क्योंकि वह अपने कुर्बानी देने के बावजूद भी धरती द्वारा  शक की निगाहों से देखा जाता है लेकिन धरती को यह पता नहीं होता कि उसकी बेचैनी  और व्याकुलता को शांत कराने में बादल की ही महत्वपूर्ण भूमिका है जिसके कारण मुसलाधार वर्षा होती है और उसे तृप्ति मिलती है !

आज के दौर में जिस प्रकार से दुनिया लोगों को मशीनों की तरह इस्तेमाल कर रही है इससे तो यही सिद्ध होता है कि इस दुनिया में आम की पेड़ बनने से और दूसरे को तृप्ति देने से अपने को तो खुशी मिलती है लेकिन तब भी यह दुनिया उस आम के पेड़ पर सबसे ज्यादा पत्थर चलाती है !!
शायद इसलिए आज के दौर में नीम का पेड़ बनना  सबसे सरल उपाय हैं ।।
क्रोध वह तूफान है जिसमें तो लोगों को यह पता नहीं होता कि वह क्या कर रहे हैं लेकिन जैसे ही वह शांत होते हैं तब तक तबाही इतनी फैल जाती है कि अपना घनिष्ठ बंधु एवं साथ में बिताया हुआ हर एक याद उनसे इतनी दूर चले जाते है कि चाहकर भी वह एक नहीं हो सकते !!

खैर जो भी हो जिंदगी जंग बन गई है आज के इस दौर में और लोग जीता जागता मुर्दा जो चाहकर भी ना हिल सकते हैं ना डोल सकते हैं ,बस... इतना कर सकते हैं कि देख कर भी अनदेखी बिल्कुल मुर्दों की तरह शायद इससे वह अपने को  बुद्धिजीवी समझ रहे हैं लेकिन वास्तव में वह अपनी जिंदगी को एक जीता जागता मुर्दाघर बना दिए हैं जहां उन्हें खुद ऐसे ही मुर्दों की तरह जीना है !