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लघुकथा

सबक

एस्क्यूज़ मी, ये बस कहाँ जा रही है?

रजिता ने साथ खड़े हुए युवक को पूछा, उस युवक ने घडी में टाइम देखा और रजिता को ऊपर से नीचे देखते हुए काउंटर प्रश्न किया,

"मेडम, नयी हो क्या शहरमें? यहाँ से तो दो-तीन जगा ही बस जाती है"

"जी, मुझे शहर के बाहर की यूनिवर्सिटी में जाना है"

"हां वहाँ तो यही से बस जायेगी, मुझे तो लगा आप किसी फैशन कॉन्टेस्ट में जा रही हो ।"

"क्या मतलब है आपका?"

बस ऐसे ही लगा मुझे, ये आपका जींस-डिज़ाइनर टॉप-गॉगल्स-और सर पर कैप और ये ऊँची दिखने के लिए ३ इंच की सेंडिल "

"ये सब मेरा पसॅनल मामला है, मुझे क्या और क्यों पहनना है खेर थेंक्स, बस की जानकारी देने के लिए"

इतना बोलकर रजिता चुपचाप खड़ी रही।इतने में बस आयी ।बस के अंदर जाते हुए भीड में उस युवक ने रजिता की कमर पर टच किया ।रजिता ने घूरकर देखा ।बस के अंदर काफी भीड़ थी तो लाइन में खड़े हुए पीछे से वह युवक काफी गन्दी हरकतें करने लगा ।

"आप सीधे खड़े रहेंगे की मैं आपकी कम्प्लेन करूं?"

" हा...हा ...हा ...हॅसते हुए वह बोला,

ऐसे कपडे पहननेवाली लड़की की कम्प्लेन कौन सुनेगा? कॉलेज में तेरे जैसी सब लड़कियाँ मज़ा करने ही आती है "

और ये सुनकर फटाक से रजिता ने पीछे घूमकर उस युवक को दो-तीन थप्पड़ जमायें और बस को रुकवाया,

अपना आई कार्ड दिखाते हुए बोली,

"मिस्टर मजनू, तू अब पकड़ में आया है, तेरी बहोत सारी कम्प्लेन आयी है, मैं इस एरिया की नयी पुलिस इन्स्पेक्टर हूँ।और लड़कियाँ जींस अपनी कम्फर्ट-सेफ्टी के लिए, गॉगल्स धुप से बचने के लिए और ये शार्प सेंडिल तेरे जैसे मजनू को पीटने के लिए पहनती है"

और वहाँ खड़े सभी पब्लिक ने इन्स्पेक्टर रजिता को बधाई दी
-मनीषा जोबन देसाई