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आईने भी क्या झूठ बोलते हैं ! अनेक चेहरा अपने अंदर हमें दिखाते हैं , हर एक आईना कुछ कहता है । हमारे साथ शायद कुछ साजिश भी करता है ।कोई आईना हमें उत्कृष्ट बताता तो कुछ आईने  हमें औसत तो कई आईने तो इस शक में डाल देते हैं कि हम औसत से भी कम हैं 😊 शायद आईने झूठ बोलते हैं 😉 वह कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ रोज साजिश करते हैं हमारी ही चेहरे के साथ अनेक उलझन के घोसले लटका देते हैं ।
कितने बेचारे तो इसी चिंता में 24 घंटे गुजार देते हैं कि हमारा चेहरा कहीं हमारा ही श्राप ना बन जाए किसी और चेहरे का हम शिकार ना बन जाए जिसके लिए इंप्रेशन झाड़ना था कहीं वह किसी का प्रॉपर्टी ना बन जाए और हम किसी गरीब किसान  की तरह दिन रात किसानी करें और मुनाफा कोई और ले जाए !!
शायद यह सब सोच एक आईना के चलते ही होता है क्योंकि कोई आईना तो वास्तविकता से हमारा भेंट करवा देता है तो कोई आईना मृगतृष्णा की भांति हमसे दिन रात छलावा करता है जिसके कारण हम प्रायः दुखी होते हैं । तो जीवन में हमें ऐसे आईने के साथ होना चाहिये जो हमारे आलोचक हो !!
वैसे क्या हमें सब कुछ आईने पर ही छोड़ना चाहिए या उन पर भी जो हमारी वास्तविक सुंदरता को पहचानते हैं । क्योंकि आईना हमारा एक रुप ही दिखा सकता है । वास्तविक रूप तो हमारे आस पास के लोग ही ; लेकिन अगर वह आईने से थोड़ा अलग हो तो ! क्योंकि आसपास का समाज जिसे वास्तव में हम समाज समझ रहे हैं वह भी कई आईनों में बटा है तो आईनो से सावधान ! ☺️

- स्वलिखित