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प्र. आप का पूरा नाम?

उ. पूनम ‘पूर्णाश्री’

प्र. जन्म दिन?

उ. 13 नवम्बर 1966

प्र. जन्म भूमि और माता पिता के बारे में बताएं?

उ. मेरी जन्म भूमि अलीगढ़ जिले के अन्तर्गत आने वाला कस्बा अतरौली है। मेरी मां घरेलू महिला और पिताजी सरकारी मुलाजिम थे।

प्र. बचपन का कोई यादगार लम्हा?

उ.  मेरी सब यादगार घटनायें अंतराल में कैद हैं। फिर भी बताती हूँ जब में रसोईघर की खिड़की पर चढ़ कर नाच रही थी और गिर गई थी। दूसरी यादगार घटना है कि मेरे न चाहते हुये मेरे रेशमी बाल नाई द्वारा बेतरतीब ढंग से काट दिये गये और मैं बहुत दुखी हुई । दोनों चोट गहरी थीं।

प्र. आप की प्रारम्भिक शिक्षा की शुरुआत और शिक्षा संघर्ष के बारे में विस्तार से बताएं ताकि हमारे विद्यार्थियों को कुछ सिखने को मिले?

उ.  मेरी प्रारभ्भिक शिक्षा अतरौली के चुंगी स्कूल (नगरपालिका) में हुईलेकिन हमारी शिक्षा में शुरू से अन्त तक संघर्ष ही संघर्ष था। आवश्यक संसाधनों का अभाव, बालिकाओं के प्रति समाज का नजरिया, कस्बे में पर्याप्त स्कूलों का प्रभाव हमारी शिक्षा में रूकावट पैदा करता था।

प्र. आप के जीवन में साहित्य का जुड़ाव कैसे हुआ? लिखने की प्रेरणा कहां से मिली?

उ.  मुझे याद नही है कि साहित्य का जुड़ाव कहाँ से और कैसे हुआ लेकिन पढ़ने की आदत ने मुझे साहित्य के करीब ला दिया। अपनी कोचिंग क्लास में टीचर की बुक शैल्फ से विमल मित्र, शरदचन्द और प्रेमचन्द के उपन्यासों का ही चयन करती थी।

 प्र. आप के परिवार में और कौन-कौन साहित्य में रुचि रखते हैं?

उ.  मेरी बहन भी साहित्य में रूचि रखती है और लिखती है।

प्र. साहित्य से सम्बंधित किन परेशानियों का आप को सामना करना पड़ा?

  उ.  साहित्य सम्बन्धित परेशानियाँ विषय कोई भी हो वहीं खड़ी मिलती हैं। आज काम से ज्यादा नाम बिकता है, मुझे बस लिखना अच्छा लगता है सो लिखती हूँ।

प्र.  आज के साहित्य को आप किस नजरिए से देखती हैं?

उ.  आज के साहित्य में समाज के बदलाव की संभावना नजर आती है।

प्र. आज डिजिटल और सोशल मीडिया के आ जाने से साहित्यकारों के लिए क्या एक नया अवसर है?

  उ. हाँ सोशल मीडिया के आने से स्वतन्त्र और गुमनाम लेखकों कोएक नाम और पहचान मिलती है जिससे वे प्रोत्साहित होते हैं।

प्र.  कविता लिखना ज्यादा अच्छा लगता है या कहानी?

उ. मुझे कवितायें रचना पसन्द है क्यों कि वह थोड़े में ही बहुत कह  जाती हैं। मगर विस्तृत विषय पर कहानी भी लिखती हूँ।

प्र.  आप की पहली रचना और वह कैसे प्रकाशित हुई?

उ. मेरी पहली रचना ‘फूल की पुकार’ एक कविता थी जो जनसंख्या पर केन्द्रित थी। बढ़ती हुई जनसंख्या पर आधारित विषय पर एक समाचार पत्र ने इसे प्रकाशित किया।

प्र.  अपनी पुस्तकों के बारे में बताएं?

उ.  मेरी पहली पुस्तक ‘कविता कानन’ थी जो ग्यारह कवियों का संयुक्त काव्य संग्रह थी। मेरी दूसरी पुस्तक अंतराल है जो मेरे बचपन की स्मृतियों पर आधारित संस्मरण हैं। अंतराल पिछले चालीस सालों में आये समय के बदलाव को भी चिन्हित करती है।

प्र. साहित्यक सम्मान और पुरस्कारों से आप का क्या नाता रहा है?

उ. पाठकों का प्यार व सराहना ही एक लेखक के लिये सबसे बड़ा सम्मान होता है। हाँ पुरस्कार मिलने से आत्मविश्वास में वृद्धि अवश्य होती है। मुझे अपने क्षेत्र में स्वतन्त्र लेखक मंच पर‘पर्यावरण मित्र सम्मान’ और ‘सरस्वती रत्न’ सम्मान दिया गया है।

प्र. लिखने के लिए समय कैसे निकालती हैं?

उ.  हां ये बात तो सही कही आपने। डिजिटलाइजेशन और सोशलमीडिया के इस युग में आपका समय सिर्फ आपका ही नही है। लाइन बहुत लंबी है मगर लेखक के लिये समय निर्धारण आवश्यक है। मैं भी अपनी ग्रहस्थी के कुछ घन्टे निकालकर लेखन में देती हूँ।
 

प्र. वर्तमान में आप क्या लिख रही हैं?

उ.  वर्तमान में मेरे पास कई विषय हैं जिन पर मैं काम कर रही हूँ। भविष्य में उनको मूर्त रूप देना चाहूँगी।
 

प्र. और आप की ऐसी कोई अभिलाषा जिसे आप लिखना चाहती हों?

उ.  क्यों कि मैं एक औरत हूँ अतः यही मेरा विषय है और मैं भारत की जिम्मेदार नागरिक हूँ अतः पर्यावरण को लेकर अवश्य ही कुछ लिखना चाहुंगी।

  प्र. क्या आप कवि सम्मेलनों में भाग लेती हैं?

 उ. सालों पहले कवि सम्मेलन हमारी साहित्यक गतिविधियों काहिस्सा थे अब नही।
 

प्र. आप के साहित्यक मित्रों के बारे में बताएं?

 उ. मेरे साहित्यक मित्र साहित्य से ही है और साहित्य में ही हैं और सभी के अनुभवों के सानिध्य में मुझे भी बहुत सीखने को मिला।
 

प्र. एक लेखिका होने के नाते भारत की वर्तमान व्यवस्थाओं के बारे में आप की क्या राय है और आप किस बदलाव की उम्मीद करती हैं?

  उ. एक लेखिका होने के नाते मैं लड़कियों की सुरक्षा हेतु कड़े नियम और कानून व्यवस्था में बदलाव चाहती हूँ।
 

प्र. हमारी मातृभाषा हिंदी के बारे में क्या कहना चाहेंगी?

उ.  मैं हिन्दी लेखिका हूँ साथ ही हिन्दी भाषी और हिन्दी प्रेमी भी। हिन्दी पर अधिक जोर रहे क्यों कि ये मधुर भाषा है। हिन्दी के बारे में एक लाइन ‘जग घूमया थारे जैसा न कोई

 प्र. आप की व्यवसायिक और कार्यक्षेत्र के बारे में बताएं?

उ.  मेरा कार्यक्षेत्र मेरा समाज है जरूरतमंदों के लिये काम करना औरसमाजसेवा ही मेरा व्यवसाय है। प्रदूषण मुक्त भारत और जलयुक्त जीवन के बारे में अनभिज्ञ लोगों को जागरूक करना ही मेरा कर्म है।
 

प्र. नये लेखकों को आप क्या संदेश देना चाहेंगी?

उ.  लेखन जन्मजात नही होते परिस्थितिजन्य ही होते है, अपनी भावनाओं को व्यक्त करना ही लेखन है। जो सोचते हैं, जैसा सोचते हैं कागज पर उतार दीजिये जरूरी नही महाकाव्य की रचना हो कुछ तो अवश्य ही रचित होगा।

 प्र.  स्टोरीमिरर पर लिखने का कैसा अनुभव रहा?

उ.  स्टोरी मिरर के साथ काम करने का अपना ही आनन्द है। यदिमाहौल दोस्ताना हो तो सीमायें नही रहती। यह भाव साहित्यक क्षेत्र के लिये सर्वथा उपयुक्त है।

  प्र. स्टोरीमिरर के बारे में कुछ कहना चाहेंगी?

 उ.  स्टोरी मिरर नवागत लेखकों के लिये वह सही मंच है जो उन परभरोसा कायम कर उनकी भावनाओं का सम्मान करता है। स्टोरी मिरर स्वतन्त्र लेखन की सीमा को लेखन द्वारा निर्धारित करने की स्वतन्त्रता देता है।