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भगवान भी आज मनुष्य की करतूतें देख कर परेशान है, दुखी है.....!

इंसान को इस तरह दिशा विहीन तथा कुदरत से हर पल खिलवाड़ करता देख कर भगवान ने सोचा क्यों ना इंसान को किसी तरह सीधी राह लाया जाए.....!

शायद यह भी सोचा होगा  कि मनुष्य ने इस तरह ना सीखना समझना है....! और फिर एक ऐसी दुःख तकलीफ़ वाली कोरोना नामक बीमारी मनुष्य को दी ताकि मनुष्य सीख पाए, समझ जाए तथा संभल जाए.....!

मगर अफ़सोस सब कुछ उल्टा हो गया......!
मालिक की तरफ़ से आए इस दुःख पीढ़ा रूपी सबक़ को भी इंसान ने व्यवसाय का साधन बना दिया......! इंसान मौत का सौदागर बन गया....! वो कहावत हैं ना मुर्दे पर ही रोटियाँ सेकनी शुरू कर दी....!

वैसे तो कहा जाता था कि एक मनुष्य ही दूसरे मनुष्य के काम आता है मगर यहाँ कुछ इस तरह उल्टा ही हो गया.....!

(१) कुछ डॉक्टर तो भगवान का ही रूप बन गए और सेवा भाव से लोगों का दिल जीत लिया मगर कुछ डॉक्टर शैतान को शर्माने वाली हरकतों पर उतर आए तथा बीमारी को एक मौक़ा बनाकर इंसान को लुटेरों की तरह लूटना शुरू कर दिया....!

(२) कुछ दवाई बेचने वालों ने सोचा हम क्यों पीछे रह जाएँ, फिर शुरू कर दी काला बाज़ारी और वही लूटपाट.....!

(३) कहीं ऑक्सिजन पर काला बाज़ारी तो कहीं उसके साथ के हर साधन सामग्री पर काला बाज़ारी.....!

(४) कुछ मौक़ा परस्त ऐम्ब्युलन्स वाले भी इस होड़ में शामिल हो गए तथा लूटने को पुण्य का काम समजते हुए वे भी शुरू हो गए.....!

(५) अंत में अपने स्वजनों को मौत की सौग़ात मिलने पर भी दुखी इंसान को छोड़ा नहीं गया, कुछ स्मशान वालों की तरफ़ से ऐम्ब्युलन्स से उतारकर चिता पर छोड़ने के लिए भी एक भारी क़ीमत देनी पड़ी......!

जो किसी तरह बच गए या किसी का स्वजन दुनिया छोड़कर चला गया मगर उनके लिए भी पीछे सिर्फ़ और सिर्फ़ एक मजबूर ज़िंदगी बच गयी जो हर तरह अपने आपको क़र्ज़ में डुबाकर बैठ गए.... अब उनके पले रह गए थे- मानसिक तनाव, चिंता एवं क़र्ज़ पूरा करने के लिए संघर्ष, संघर्ष और सिर्फ़ संघर्ष......!

अब सोचना यह है कि जो तो भगवान का रूप बनकर, सेवा कार्य में जुट गए तथा लोगों का भला करते हुए दूसरों कि निस्वार्थता से सहायता करने लग गए वे तो सचमुच अपनी इंसानियत को जिंदह रख कर भगवान का रूप बन गए.....!

काश कुछ नेता भगवान का रूप ना सही मगर इंसान ही बन गए होते.....! जिस जनता जनार्धन ने चून कर अपनी सार सम्भाल एवम् सेवा कार्य के लिए कुर्सियों पर बिठाया काश उनके दुख दर्द को देख पाते....!

हम में से जिन्होंने काला बाज़ारी की, काश वे उस दुख दर्द को एवम् मजबूरी को देख पाते.... अरे सेवा ना ही सही मगर थोड़े से मुनाफ़े से ही दवाइयों को तथा मेडिकल साधनो  को बेचते तो भी शायद भगवान का रूप ही कहलाते......!

मगर शैतानियत वाली करतूत की है तों ऐसे शैतानों तथा हैवानों को बहुत बारी क़ीमत चुकानी होगी, वे नहीं जानते कि जब इंसाफ़ होता है तब कोई नहीं छूट सकता क्योंकि भगवान की दरबार में देर हो सकती है मगर अंधेर नहीं.....!

भगवान की दरबार में तो उनका जो होगा सो होगा मगर हमारी भी एक नैतिक जिम्मेदारी है- कि हम उन शैतानों तथा हैवानों को बेनक़ाब करें उनकी करतूतों को नंगा करें जिन्होंने इंसानियत का चोला ओड्डकर, बहुत ही बेशर्मी से इस महामारी को अपना व्यवसाय बना कर लूट मचायी तथा इतनी बे दर्दी से उन बीमारों को भी नहीं छोड़ा जो लाचार थे बेबस थे....! उन शैतान दरिंदों ने तो अपनी करतूतों से भगवान को भी शर्मसार  कर दिया.....!

वैसे तो दुआ करनी चाहिए कि हे भगवान दुश्मन को भी माफ़ करना तथा उनका भी भला करना मगर क्या ऐसी हैवानियत माफ़ी के काबिल भी हैं........?

कब तक हम ऐसे करतूत  सिर्फ़ और सिर्फ़ सुनते एवम् सुनाते रहेंगे....?
अब वक्त आ गया है उस नैतिक ज़िम्मेदारी को निभाने का, उन शैतानों के ऊपर से इंसानियत का जाली परदा हटाने का....!

इंसानियत का पहला पहलू: निष्काम सेवा कार्य करने वालों के नाम तथा उनको नतमस्तक सलाम.......!

हमें साथ मिल कर उन व्यक्तियों का हौसला भी ज़रूर बढ़ाना चाहिए, जिन्होंने अपनी परवाह ना करते हुए ना सिर्फ़ अपनी जिम्मेदारी निभायी है मगर उस से बढ़ चढ़कर सेवा कार्य करके इंसानियत को जिंदह रखा है एवम् आज भगवान का रूप बन गए हैं.....!
आज हमारी दिल की तय से दुआ है, भगवान उनको बल-सामर्थ्य से निवाजें, हर पल उनको तथा उनके परिवार वालों को खुश रखें, सुखी रखें ताकि इस इंसानियत को वे अपने सेवाभाव से जिंदह रख पाएँ.....!

Hargovind Wadhwani