Image

हिन्दी चैट उपन्यास-'यू एंड मी...द अल्टिमेट ड्रीम ऑफ लव'

लेखक द्वय - मल्लिका मुखर्जी व अश्विन मॅकवान


मल्लिका मुखर्जी व अश्विन मॅकवान लिखित 'यू एंड मी...द अल्टिमेट ड्रीम ऑफ लवहिन्दी चैट उपन्यास को मैंने दो बार पढा। दो बार इसलिए पढा क्योंकिएक बार से मन नहीं भरा। आज के दौर में ऐसी लव स्टोरी कहाँ बनती है! जीवन में जो हम चाहते है वह होता नहींशायद यही फर्क है भगवान में व इंसान में;हम जो चाहें वह हो जाये तो कदाचित हम भगवान हो जायें। इस किताब में भी ऐसा ही कुछ हैजो सोचा वह हुआ नहींजो हुआ वह कभी सोचा नहीं था। हालाँकि मैंने किसी पुस्तक पर समीक्षा कभी लिखी नहीं, मुझे नहीं पता कि समीक्षा कैसे लिखी जाएइसलिए इसे मेरी पहली समीक्षा मानें।


एक दिन ‘स्टोरीमिरर’ के पेज परआदरणीय प्रीति ‘अज्ञात’  जी का 'यू एंड मी...उपन्यास पर लाइव कार्यक्रम सुना। वेजानी मानी कवयित्री,ब्लॉगर हैं, इंडियाटुडे की वेबसाइट ichowk.in में नियमित कॉलम लिखती हैं। वे ‘हस्ताक्षर’ हिन्दी वेब पत्रिका की सम्पादक,‘कर्मभूमि’ साहित्यिक संस्था की को-फाउन्डरहैं,मेरी फेसबुक फ्रेंड भी हैं।प्रीति जी का लाइव कार्यक्रम ऐसा था कि मैं भावुक हो गयाप्रीति जी को भी भावुक होते देखा।दूसरे लोग जो सुन रहे थेसबका यही अनुभव रहा होगा।उन्होंने किताब के बारे में बहुत कुछ बताया। कुछ समय के लिए वातावरण नम रहा। बस यही कारण था 'यू एंड मीको मंगवाने का। लेखिका आदरणीया मल्लिका मुखर्जी को मैंने फ्रेंड रिकवेस्ट कार्यक्रम के बाद भेजी या पहलेमुझे याद नहीं। मेरी लिखी पोस्टों पर उनकी प्रतिक्रिया कई बार मिलीआज भी मिलती है।


किताब की कहानी की बारे में कुछ लिखूंया समीक्षा करूँ इतना मेरा अनुभव नहीं व उम्र भी नहीं है। 'यू एंड मीकी कहानी जिस सन में शुरू होती हैवह वर्ष या उसके आस पास का वर्ष मेरा जन्म वर्ष हैइसलिए ऐसे अनुभवी लेखकों के बारे में ज्यादा क्या लिखा जाएयह भी अलग से समीक्षा का विषय है।


प्यार क्या हैप्यार को शब्दों के माध्यम से लिखना कदाचित सम्भव नहीं है। प्यार पर बहुत कुछ लिखा गया हैबहुत कुछ लिखा जा रहा है व मानव सभ्यता रहने तक लिखा ही जायेगा। हम कुछ भी लिखें, उसमें प्यार की मुख्य भूमिका होती है। 'यू एंड मीउपन्यास भी प्यार का एक जीवंत दस्तावेज है। 'यू एंड मीएक चैट उपन्यास हैयानि दो लोगों का फेसबुक मैसेंजर पर हुआ वार्तालाप। चैट उपन्यास पढ़ने का मेरे जीवन का यह पहला अनुभव भी हैजो बहुत दिलचस्प रहाइतना दिलचस्प कि मैंने इसे दो बार पढा। शायद यह प्यार की ताकत है या लेखक द्वय के लेखन का कमाल, यह तो आप पढ़कर ही अनुभव कर पायेंगे।


उपन्यास की कहानी में दो मुख्य पात्र हैंदोनो वही हैं जिन्होंने यह उपन्यास लिखा व प्यार को शिद्दत के साथ जीया। कहानी सिर्फ प्यार को परिभाषित करती हैसोशल मीडिया की भीड़ मेंप्यार की कहानियों व लाखों किस्सों के बीच यह दो पात्र उम्मीद जगाते हैं कि अभी बहुत कुछ शेष है।


अमूमन देखा गया है कि प्यार में दो लोग मिलते हैबिछड़ते हैपुनः मिलते है या कुछ कविताएं लिखते हैं... इसमें ऐसा कुछ नहीं इसलिए यह अनमोल उपन्यास है। कहानी ऐसी है जो आपको प्यार सिखाती हैजीना सिखाती है। यह कहानी दो प्यार करने वालों के साथ-साथ देवता रूपी एक पति की कहानी भी हैपरिवार की कहानी हैसमाज के खोखले रीति रिवाजों के खिलाफ 'बिगुलबजाने की तरह है कि ''हम इंसान हैपरमात्मा ने हमें प्यार का अधिकार दिया हैहमें प्यार हैजो करना है कर लो।


प्यार केलिए कदाचित कोई उम्र होती होगी जिसमें यौवन अंगड़ाई लेता होगा, लेकिन ऐसे प्यार केलिए जज्बात ज्यादा मायने रखते हैंभावनाएं ज्यादा महत्व रखती है। कई किस्से कहानियों में प्यार को हमेशा उफनते 'यौवनसे जोड़ दिया जाता हैइसलिए वास्तविक प्यार को हम पूरी तरह समझ नहीं पाये। यह उपन्यास प्यार की परिभाषा को सार्थक करता है।


नायिका साधारण हैशक्ल सूरत भी साधारण है व दौर 70 का दशक... 1972.... कॉलेज के दिन... उसे हीरो से ज्यादा 'हीरोदिखते एक युवक से मोहब्बत होती हैलेकिन रास्ते में अनेक बाधाएं चट्टान की तरह खड़ी है। पहला डर तो यह कि क्या हीरो जैसा युवक साधारण शक्ल सूरत वाली लड़की को चाहेगाकदाचित नही! यह जवाब नायिका खुद ही खुद को देती है। दूसरा डर हीरो के अलग धर्म से है, तो क्या समाज स्वीकार करेगाकदाचित नहीं। धर्म की दीवार 70 के दशक में आज से ज्यादा ऊँचाई पर थीप्यार को समझने वाले लोग भी सिर्फ फिल्मों में दिखते थेऐसे में इस प्यार का अंजाम क्या होना था?नायिका मन के भावों को मन में दबाकर रह जाती है।


नायिका अपने नायक से बिछुड़कर शादी करती हैघर बसाती हैबच्चे होते हैभरा पूरा सुखी परिवार... 1972 में किशोरी नायिका की उम्र वर्ष 2018 में कितनी होगीअंदाज़ा लगाइए व प्रौढ़ उम्र में इस प्यार की गहराई को महसूस कीजिये!उम्र के इस पड़ाव में जब नायिका सोशल मीडिया फेसबुक के माध्यम से अपने नायक से को पुनः मिलती हैवर्षों बाद वे एक दूसरे से चैट के माध्यम से वार्ता करते हैंयह वार्ता ही अंत में उपन्यास बनता है। कहानी में अब पति भी हैपरिवार भी हैबच्चे भी हैसमाज भी हैधर्म भी है... इन सबके बीच प्यार को कबूल करनाकल्पना कीजिये! किताब में बहुतकुछ ऐसा है जो मन जो भिगो देता है।


नायक अब भारत में नही हैसात समंदर पार लॉस एंजेलिसकैलिफोर्निया में है।नायक- नायिका का वार्तालाप उस वक़्त मार्मिक हो जाता है जब पता चलता है कि नायक गम्भीर बीमारी से ग्रस्त हैं। नायक के अंतिम दिनों में यह वार्तालाप किताब की शक्ल में पहुँचता है। प्यार को समझने केलिएनायक नायिका की इस लव स्टोरी को महसूस करने केलिए स्टोरिमिरर से प्रकाशित 'यू एंड मी - द अल्टिमेट ड्रीम ऑफ लवलेखक मल्लिका मुखर्जी व अश्विन मॅकवान को पढ़ना चाहिए। लाजवाब कहानी है।


किताब के शुरू में सुप्रसिद्ध लेखिका प्रीति अज्ञात जैन की भूमिका ही इतनी सशक्त है कि किताब को पूरा पढ़ने पर मजबूर करती है। किताब के शुरू में कुछ फ़ोटो भी हैजो नायक व नायिका की कहानी की सच्चाई पर मोहर लगाते है। यह कल्पना नहीं हैसच है... बिल्कुल सच। नये दौर में ऐसा उपन्यास एक उम्मीद की तरह हैइसे पढ़ना चाहिए।


किताब को लिखने केलिए लेखक व खासकर लेखिका ने बहुत मेहनत की है। किताब में कोई त्रुटियां नहीं हैं। किताब का नकारात्मक पहलू मात्र एक हैवह है इसका मूल्य।350 रुपए व डाकखर्च 50 रूपए मिलाकर यानी 400 रुपएहालाँकि जब किताब हाथ मे आती है तो अफसोस नहीं होता क्योंकि किताब की साइज़ दूसरी किताबों से बड़ीबहुत मोटी व वजनदार भी है। लेकिन किताब मंगवाते समय पाठक बहुत कुछ सोचता हैस्टोरिमिरर व लेखिका को मूल्य में कुछ छूट देकर इस किताब को लोगों तक पहुँचाना चाहिएक्योंकि यह अनमोल ग्रंथ है।


आज के दौर में किताबों की भीड़ में अच्छी कृति की तलाश सबको है, लेकिन माध्यम भ्रमित करते हैं। एक बार यह पाठकों तक पहुँचे तो लोग जरूर पढ़ेंगे। वैसे लिखना तो बहुत कुछ चाहता हूँमन में बहुत कुछ शेष है।उंगलियाँ और लिखना चाहती है, लेकिन मुझे पता है कि दौर शॉर्ट कट का है। बस आग्रह यह है कि यदि प्यार पर कुछ पढ़ना चाहते हैं तो यह किताब आपके लिए है। कोई अच्छी किताब पढ़ने की इच्छा है तो भी यह किताब आपके लिए है। किताब का लिंक।


https://amzn.to/2J9eg6P


धनराज माली 'राही'

लेखक-‘लौट आना मुसाफ़िर’