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बच्चों की ठीक से परवरिश कर सके पत्नी का सम्मान करे अपने बुजुर्गो की देखभाल करे संतान को सही मार्ग प्रशस्त करे वो होता है एक अच्छा पिता केवल बच्चे पैदा करके पिता नहीं बना जाता है|

जो संतान को इस काबिल बना दे की वो समाज को पवित्र रखें किसी को दुःख ना पहुंचाए निर्बल की सहायता कर सके दीन दुखियो की सेवा करे ऐसा हो समाज का रूप तो हर पिता को सम्मान मिलेगा|

पिता होने का मतलब ये नहीं की वो जो करेगा वही सही होगा वो अधर्म के बल पर प्रगतिशील होना चाहता है तो वो समाज में रहने के योग्य नहीं और  संतान अगर धर्म को पूजती है तो संतान सही है क्योकि समाज अमीर गरीब लोगों का समूह होता है कोई आर्थिक रूप से गरीब होता है तो कोई शारीरिक और मानसिक रूप से गरीब होता है अमीर केवल धन से नहीं हुआ जाता मन से भी अमीर होना चाहिए और ऐसी मानसिकता हर एक बच्चे की होनी चाहिए वो तभी होगी जब बच्चो का पिता पवित्र मानसिकता वाला हो वही अपने बच्चो को ऐसे संस्कार दे पायेगा|

जो व्यक्ति अपने बच्चो को चोरी चाकरी करना सिखाये वो पिता कहलाने योग्य नहीं जो व्यक्ति लोभ के चलते धन खर्च होने के डर के कारण अपने बच्चो को शिक्षित ना कर सके वो पिता कहलाने के लायक नहीं एक अच्छा पिता वही है हो अपनी संतान और परिवार के अन्य सदस्यो को सुखी रखे|