1. आपका उपन्यास यह संदेश देता है कि जीवन बहुत मूल्यवान है और खुशियों पर सबका अधिकार है।
इस विचार की शुरुआत आपके मन में कैसे हुई?
अपने जीवन को सुखमय बनाने और खुशियां पाने का हर इंसान का अपना अधिकार है। छोटी बडी खुशियों से इंसान का मन उत्साहित बना रहता है। जब भी मैं किसी को दुखी परेशान नीरसता से घिरे देखती हूं तो मुझे लगता है कि वो इंसान जीवन की कुछ खुशियां किसी न किसी तरह हासिल कर ले। किन्तु उनकी ऐसी स्थिति बनने मे क्या करना जरूरी है। इन विचारो से मन मे इनके लिए कुछ भाव जागे । जीवन बहुत मूल्यवान है। हम सबका जीवन तेजी से चलते समय के चक्र मे कैद है। कब जीवन का अन्त हो जाये कोई नही जानता। इसलिए हर र्वग समुदाय के लिए जीवन को प्रयत्नो से सहज बनाने पर जोर देकर मैने इस उपन्यास को लिखा।
2. इस कहानी में सामाजिक समस्याओं को जड़ से समाप्त करने की बात कही गई है।
आपके अनुसार किसी भी समस्या से बाहर निकलने का सबसे पहला और जरूरी कदम क्या होता है?
साकारात्मक सोच के साथ किसी भी समस्या से बाहर निकलने की कोशिश करने का पहला कदम।
3. उपन्यास की मुख्य नायिका गेंदा बहुत साहसी और प्रेरणादायक पात्र है।
क्या गेंदा किसी वास्तविक व्यक्ति या अनुभव से प्रेरित है?
ऐसी कई महिलाये हमारे समाज मे है। उनके अलग अलग गुणों को मैने गेंदा के व्यक्तित्व से बांघा है। मै यह मानती हूं कि नारी अपने गुणों के बल पर हर बाधा को पार कर हर क्षेत्र मे विजयी हो सकती है ।
4. आपने बालश्रम और वृद्धाश्रम जैसे संवेदनशील विषयों को कहानी में शामिल किया है।
इन विषयों को उठाने की प्रेरणा आपको कहां से मिली?
मजदूरी करते और भीख मांगते लाचार वृद्धो, और गरीब बच्चों की बदहाली को देखकर, लोगो के घरो और दुकानों में काम करते गरीब बच्चो को दुशा देखकर मैने इस बिषय को कहानी मे शामिल किया । जब भी मैने उनकी कुछ मदद की, तो उनकी तकलीफों को उनके दर्द का मैने करीब से महसूस किया और इस भावना ने मुझे इन विषयों को उठाने प्रेरित किया ।
5. यह उपन्यास शिक्षा, आत्मनिर्भरता और मनोबल के महत्व पर जोर देता है।
आपके अनुसार समाज के कमजोर वर्ग के लिए इनमें से सबसे अधिक आवश्यक क्या है?
मेरे अनुसार इन तीनों मे मनोबल सबसे अधिक आवश्यक है। मनोबल के रहते आप शिक्षा आत्मनिर्भता दोनों ही किसी न किसी प्रकार हासिल कर सकते है। मनोबल के बिना आप किसी भी क्षेत्र मे आगे नही बढ सकते।
6. गेंदा का गांव से शहर तक का सफर कई सामाजिक सच्चाइयों को उजागर करता है।
इस यात्रा के माध्यम से आप पाठकों को क्या दिखाना चाहते थे?
इस यात्रा के माध्यम से मै. यह दिखाना चाहती हूं कि हर किसी के जीवन मे छोटी बडी समस्याये है। युक्ति और प्रयासों से अपने जीवन की नीरसता से स्वयं निकले और दूसरो को भी निकाले । साकारात्मकता के साथ आगे बढे। अपने और दूसरो के जीवन में खुशियां बिखेरने के प्रयास करते रहे। छोटे छोटे प्रयासो से यदि दुख दूर नही भी हुए तो भी जीवन मे कुछ सहजता तो आ ही सकती है।
7. आपकी कहानी रोचक प्रसंगों के साथ सामाजिक चेतना को बढ़ाने का प्रयास करती है।
लेखन के दौरान संतुलन बनाना-मनोरंजन और संदेश के बीच-कितना चुनौतीपूर्ण रहा?
लिखते समय कुछ चुनौतियों का सामना करना पडा । किन्तु मानसिक संतुलन बना रहा। ईश्वर पर हमेशा भरोसा रहा कि जो भी लिख रही हूं। मै सिर्फ माध्यम हूं। अगर लोगो तक मेरा लेखन पहुंचना होगा तो किसी न किसी तरह पहुंच ही जायेंगा। उपन्यास में मनोरंजन और संदेश कहीं कहीं मेरे जीवन की वास्तविकता के करीब है इसलिए लिखना सहज और रूचिर्पूण था।
8. आज के समाज में संवेदनशीलता और सहानुभूति धीरे-धीरे कम होती जा रही है।
क्या आपको लगता है कि साहित्य इस दिशा में बदलाव ला सकता है?
वर्तमान समय मे ऐसा देखने में आ रहा है। किन्तु आज भी समाज में अच्छे और संवेदनशील लोग है। जो लगातार समाज मे अपना अच्छा योगदान दे रहे है । समाज मे बाल मजदूरी और बढते वृद्धाश्रम हम सबके लिए सोचनीय प्रश्न बन गये है। समाज मे जागरूकता लाने मे लेखन की महत्वपूण भूमिका होती है। किसी के द्वारा कही, कोई बात यदि मन को छू जाये तो वो बात वो विचार, हमारे अन्दर की चेतना मे यदि आग नही लगा सके तो चिन्गारी तो सुलगा ही सकते है ।
9. इस उपन्यास को लिखते समय
क्या कोई ऐसा दृश्य या प्रसंग था जिसने आपको भावनात्मक रूप से सबसे अधिक प्रभावित किया?
हां मुझे भावात्मक रूप से इस प्रसंग ने सबसे अधिक प्रभावित किया जब सरस्वति नानी ने गेंदा की शादी के लिए विचारों की समानता पर जोर दिया और उपन्यास की नायिका ने इतने बडे घर से आये रिश्ते के सामने अपने लक्ष्य को सर्वोपरि रख शादी के बाद भी अपने लक्ष्य को पूरा करने की र्शत रख नारी की दृढता का परिचय दिया ।
10. जब पाठक इस उपन्यास को पढ़कर अंतिम पन्ना बंद करें,
तो आप उनके मन में कौन-सा विचार या भावना छोड़ना चाहते हैं?
जीवन मे यदि समस्याये है तो उनके कुछ न कुछ हल भी है। साकारात्मक उर्जा हमारे हित मे काम जरूर करती है । अपने और दूसरों के जीवन मे सुगमता और खुशियां लाने के प्रयास कर अपने जीवन को सार्थक बनाये । समस्या आने पर कभी हार न माने। प्रयत्नों से यदि हमे अधिक नही भी मिल सका तो भी जीवन मे कुछ राहत कुछ खुशियां तो मिल ही सकती है। जो हार कर बैठने और दुखी रहने से कभी नही मिल सकती ।