Category : Self
स्त्री शक्ति
 Manisha Joban Desai  
 20 February 2018  

स्त्री शक्तिस्त्री और पुरुष इस विश्व की धरोहर मानें जाते हे। कही दोनेा में से कोई एक दूसरे से ज़्यादा ज़रूरी या ताकतवर है, उसके विवाद में न पड़ते हुए, एक बात तो तय है कि स्त्रियो को ज़रूर कुछ ऐसी अनदेखी शक्तियाँ मिली है।इतने युगों से धरती पर जितने भी परिवर्तन आये है उसमें बार-बार स्त्रियों को कभी देवी मानकर पूजा गया, या किसी युग में उसे अपमानित किया गया॥ हमारे पौराणिक शास्त्रों की कथा में हम सबने पढ़ा-सूना है उनकी जीत और उनकी यातनाओं के बारे मे,। पृथ्वी की उत्त्पत्ति से लेकर आज के आधुनिक युगतक स्त्रियों की परिस्थिति में भूतल की बदलती सतह की तरह ऊपर-तले होना उसकी मजबूरी रही हे। शायद इसका एक कारण उसकी शारीरिक रचना और मातृत्व धारण करने की जिम्मेदारी मानी जाती हे। शारीरिक ताकत में कुदरत के इस मातृत्व के वरदान से तो उसकी सहन शक्ति ज़्यादा गिनी जानी चाहिए, लेकिन सामाजिक उसूलों की अनदेखी जँजीरोने उसके अस्तित्व को बाँध दिया है॥ दुनिया का कोई भी काम ऐसा नहीं जो स्त्रियाँ नहीं कर सकती, और जितने भी कार्य ऐसे है जिसमें उन्हें रोका जाता है, वह सब कामों में वह सक्षम होते हुए भी कभी ऑनर की दुहाई देकर या कभी अपनी हार को जीत में बदलनेके लिये स्त्रियों को इमोशनल करके उनसे पीछेहठ करवाई जाती है। इतिहास में स्त्रियों को सम्मान देने का जिस युग में विवरण किया गया है वहाँ भी काफी कहानियाँ उनके अस्तित्व के बलिदान की भी प्रसिद्धः है। ऐसा नहीं है कि स्त्रियों को अपने अस्तित्व को पुरुषों जितना ही उजागर करने में अपनी तरफ से कोई परेशानी है, वो अपने अंदर का आत्मविश्वास पूर्ण तरीके से तेज़ कर चुकी है, लेकिन अपने साथ जो उसके ऊपर अपनी संस्कृति की रक्षा का बोझ, कभी परिवार का मान सम्मान तो कभी उसके मन की नाजुक भावनाओं को छलते हुए उसे सिर्फ़ पारिवारिक जीवन का पूरक बनाकर उलज़ा देते है। और ये सिर्फ़ पुरुषों की तरफ से नहीं हो रहा, स्त्रियाँ खुद दूसरी स्त्रियो को आगे बढ़ने में दिक्कतें खड़ी करती है ।काफी स्त्रियाँ, डरकर सहयोग देने से डरती है और काफी स्त्रियाँ ईर्ष्यावश, सास ननंद, भाभी, सहेली या, ऊपरी कर्मचारी का रूप बदलकर स्त्री के अंदर रही पूर्ण रूप से खिलने की शक्तियों को क्षीण कर देती है। कुछ स्त्रियाँ ये सब बंधन तोड़कर अपने आत्मविश्वास के साथ अपना जीवन अपने तरीके से जीती है, उन सबको भी अपने समय में उतनी ही दिक्कतें आयी थी। लेकिन अपने साहस और अपनी ताकत से अपना मार्ग बनाया। सीता से लेकर द्रौपदी, रज़िया सुल्तान से लेकर रानी दुर्गावती, रानी लक्ष्मीबाई, इंदिरा गांधी किरण बेदी, सानिया मिर्ज़ा और अपने देश की कितनी उद्योग साहसिक महिलाओं के उदाहरण स्त्री-एम्पावरमेंट के इस दौर में दिए जाते है, लेकिन सब औरतें ऐसी थोड़ी बन शक्ति है? सिर्फ़ कुछ अलग बनने की प्रेणना ले सकती है।अपने संजोग, और अपनी ज़रूरत के हिसाब से पहले अपने खुद के शिक्षण, कैरियर और आर्थिक विकास को मजबूत बनाकर परिवार के सहयोग में साथ चलना चाहिए फिर परिस्थिति को धीरे-धीरे धीरे बदलते हुए पूरे परिवार की महिलाओं को कन्विंस करना चाहिए की वह भी अपने परिवार के साथ अपनी खुद के विकास को आगे बढ़ाने में रास्ते सरल बनाते जाए. और अगर इतना करने में अगर हम कामयाब रहे तो फिर अपने आसपास के माहौल, अपना कार्यक्षेत्र और बहार के समाज की गतिविधियों में अपना स्थान मजबूत बना सकेंगे। हमारी रोजमर्रा की ज़िंदगी में आपने महसूस किया होगा की हम कितनी पुरानी, जंग लगी हुई सोच अपने से लपेटे हुए हमारे वर्तमान को डल बना देते है। ये सब हमारी पुरानी सुनी हुई या कभी कभार देखी हुई फैलियर्स होती है। जो हमें नए रास्ते बनाने से रोक लेती हे। कभी धर्म के नाम से, कभी, सुपरनेचुरल चीजें और कभी सुरक्षा के नाम पर हम कितनी नयी दिशाओं से महरूम रहे जाते है, जो हमें अपने जीवन के ऐक नये प्रकाशपुँज से परिचय कराती है। वो है हमारी शिक्षा, जो हमें अपने माता-पिता-गुरु-मित्रो और सहकर्मियों से प्राप्त होती हे और वही हमें हमारी अनदेखी जंजीरों से आज़ाद कराएगी। हर ऐक स्त्री कुछ ना कुछ हुनर शिखकर अपना एक अलग व्यक्तित्व उभार सकती है, जहां वह आर्थिक, सामाजिक और इमोशनल रूप से साबित कर सकती है। जब भी हम मीडिया पर भी न्यूज़ देखते है, और देश के विविध राज्यो में महिला ओ के साथ होते हुए अन्याय, अत्याचार और बलात्कार वगैरह से विचलित होते है और सुरक्षा का विचार सबसे पहलेमन में आता है। फिर भी बदलती हुई नइॅ सोच, आधुनिक उपकरणों की मदद और अपने आपको टेक्नोलोजी की सहाय से आनेवाली नयी पीढ़ी के युवा मानस को एक खुली सोचवाला और सुरक्षित बदलाव दे सकते है। सोशल मीडिया, जिससे हम मानते है कि दुनिया छोटी हो गयी है, लेकिन साथ में वहाँ भी महिलाओं के लिए पाबंदी है। क्यूँकी हर बात को कब कोई सेक्स से जोड़ दे या किसी भी लड़की को घर बैठने के लिए मजबूर कर दे ये कहा नहीं जा सकता। और इतना विकसित होने के बाद भी आखिर में एक सीमित दायरे में ही विकसित होने की सलाह दी जाती है। जिसकी वजह से कितनी नयी बातें और नए विकास से महिलाएँ पीछे रह जाती है और ये स्थिति सिर्फ़ हमारे यहाँ नहीं सभी देश की महिलाओ कोऔरो की मानसिक बर्बरता के कारण अपनी वर्तमान स्थिति को बदलना पड़ता है।बदलाव, महिलाओं की शक्ति, आगे बढ़ाने की बातें और सशक्तीकरण की योजनाएँ महिला पूरी तरह समझकर अगर उसके सहयोग से अपना विकास करना चाहे तो पूरा आकाश उनके सपनों को पूरा करने के लिये खुला है। बस ज़रूरत हे तो हौसले से अपना पहला कदम उठाने की और मज़बुती से नयी राह पर अपनी चाल को और गतिवंत बनाने की। हमारी फ़िल्मों में भी काफी मजबूत केरेक्टरवाली महिलाओं के किरदार परदे पर दिखाए है और नये-नये उदाहरण हमारे सामने रखते है। उनमें वर्किंगवुमन से लेकर हरेक क्षेत्र की महिला ओ की दुविधा ओ को चित्रित किया गया है। पर ये सब अभी शुरुआत है, वेस्टर्न वल्डॅ की महिलाओ को जितना ह्नमन राइट के बेनिफिट मिलते है उसकी बराबरी करने में शायद हम काफी पीछे है। फिर भी अपनी युवा पीढ़ी स्वतंत्रता के नए आकाश में उड़ान ज़रूर भरेगी और इसमें सबसे ज़्यादा महिलाओं की अंदरूनी शक्तियां ही उन्हें कामयाब बनाएगी। हमारे राज्य में महीलाओ के लिये जितनी भी योजनाएँ बनायी जाती है, उनके बार में अवगत कराना भी बहुत ज़रूरी है जीस से ये बातें सिफॅ पेपर पर न रहे जाये। काफी हद तक सामाजिक संस्थाएँ ये जिम्मेदारियाँ उठा रही है, लेकीन महीलाओ को खुद माहीती कलेकट करके ऐलटॅ रहनां ज़रूरी है, जीससे वह महत्तम सुविघाऐ पा्प्त करके कोइ भी लघुउघोग वगैरह शुरू करे और अपनी स्कील का उपयोग करे।-मनीषा जोबन देसाई

You: An unseen, unspoken force
 Suchismita Sahu  
 25 February 2018  

It wont be wrong if I say that 2017 was a time period, in which I explored myself with many such qualities which were hindering my self-exploration since my birth. On particular rough days, I like to remind myself that my track record for getting through bad days, so far is 100% and that’s pretty good. I welcomed a new morning by forgiving everyone, who were the cause of my all these days. Inner peace began, the moment I chose not to allow another event or person or the complete world to control my emotion. When I realized this, I started accepting some of my qualities such as stubbornness, emotional, introvert and caring in a positive way, because of which I had suffered my life in a negative way. I stopped explaining myself, when I realized people only understand from their level of perception. So, I was able to completely come out from the ‘Log Kya Kahenge’ attitude. Me, Myself and My writings… that’s all got at the end.I thank to everyone who were my co-passengers of this journey, my toastmaster family, my Trifecta family, my office colleagues and at last but not the least, my own family, my tiny fishes, flower plants and my cute pug…A special thank goes to you who taught me about meditation and encouraged me to follow my passion. Though some of your words were pinching me like the prickles of a cactus, but I tried to go to the depth of those and took a challenge to make you realize next time that the time has come for you to throw one more prickle word towards me. Thanks for all the comments which were coming from an unspoken and unseen energy, pushing me to climb another step up of the ladder of my life,.Going to start a new year with again some unexpected, unwanted and not much encouraging circumstances. Again, let’s see, how the year 2018 is becoming one more milestone in my self-exploration.

WITH MYSELF
 Sanjana Panda  
 7 March 2018  

Iwake up in the cashmere glow of my white sheet; the sun's shining bright and I go and get dressed in a lavender lilac dress. My unmade hair flies more than it should, as it flows away with the wind; it's raining now. The sun comes and goes; the rain never stops waiting. Their love is futile, but so is everything in love.The guy at the coffee shop smiles at me a little more today, more than he usually does everyday. I give a faint smile back. I sit down as I look at a stranger walk in, he wasn't one a summer ago. I can almost smell the daisies he got me, clutching them as he was nervous about our first date, I can remember our first date, the second, the third, and all of the others. I'm not great at remembering smells, but this smell is like a spell. And I do not know how to break a charm. It was love that I had in mind a summer ago, it is till now that he has a love for just himself.It's still raining even though the sun is still out, enough to drench my hair and my dress wet. I look at people running for cover; a woman goes running past me, after her hat. It is a complete mayhem though, but this is a feeling nothing can replace. I twirl my lilac dress and laugh, I laugh hard enough that I gather unwanted stern looks from strangers as the rain drops still dance with me, and I realise, I don't care about their opinions anymore.It's the funny feeling in my stomach that makes me laugh at nothing. I'm happy. I feel alive. Am I in love? Probably. And for the first time, with myself.#smblogcontest

Everything you need to know about Prabhat Ranjan
 StoryMirror Feed  
 14 April 2018  

Prabhat Ranjan is a Hindi novelist from Bihar. He entered the writing scene with his debutnovel With You; Without You in the winter of 2017 and since the launch of his debut novel,his popularity as an author has only reached new heights.A less talkative person, Prabhat Ranjan comes from a family with a political background andhis father is a senior politician. An engineer by profession, Prabhat has been writing shortstories and poems way before he finally decided to enter the field of writing formally with afull-length fiction. Nevertheless, as an engineer, Prabhat did not let himself be aloof ofliterature - he is a serious reader as well as a serious author and he wants to contributemore and more with his pen.Already finished his second novel, Prabhat Ranjan's writing style is very different from otherfiction writers out there. He has uniqueness! His writings are not only meant to create abestselling fiction; he has his purposes in every word he writes. Even with the first novel,which subsequently became a bestseller, he had a very good message to deliver to the reading audience. The novel is not only about love and friendship, it is also about the depths of relationships. With You; Without You shares a message with the readers that the need of family and the need of good company in life can never be substituted with anything!To put things in a better perspective, Prabhat is from that old school of writers with hisimagination not limited to a certain theme or story. He does write with the purpose but hedoes not limit himself to write only the moral stories which seem like a preacher's sermon;his stories do have the elements which make them contemporary and offer the youngreaders something to relate to.In developing characters, Prabhat does have a speciality! In his first novel, he has proved tothe readers as well as to critics that his characterisation is unique and he gives ampleopportunity to his characters to converse, indulge, move on and eventually change. In thevery first novel, his character Nishind has impressed the readers a lot. The character ofNishind is designed in such a way that readers know he might be doing something wrongbut instead of denouncing his acts, readers develop a kind of sympathy for him. This is thebeauty of his character. Another character that impresses the readers is of Rashmi Desai -an independent working woman who braves the bad relations of her parents and the wrongdeeds of her friends but still manages to fulfil her dreams and reach the heights that she hasimagined for herself in the very childhood.In the terms of plot construction, nonetheless, the readers can surely expect somethingbetter only. As the author has himself admitted in many of his interviews, With You;Without You was just a staircase that he has used for himself to write something bigger - hisupcoming story, Priyanka - A Pakistani Girl. Therefore, the plot in his first novel does notimpress as does his story or his characterisation. Still, his plot is there to certainly be calledgood and it helps the construct of the novel; it surely holds the story and the characterstogether but can certainly be improved to betterment.Putting Prabhat Ranjan's entry into Hindi literature in a larger perspective certainly gives thereaders something new as a concept of Hindi literature. More and more young and energetic writers are coming who are willing to write in Hindi and offer the readers the works which deal with the issues other authors, in the past, did not wish to write. Prabhat's dealing with the issues like sex, love, divorce, family issues in vivid perspective is certainly new and encouraging for the overall contemporary Hindi literature. One can certainly argue that there were the authors who wrote on all these issues, but one must remember that they did not write as freely as the modern authors are doing. And it is certainly very good because of the modern readers want to read everything!And to conclude the contribution of Prabhat to Hindi literature and his current one, WIthYou; Without You, it can safely be said that he has a long road to go. Only after two of threemore of his works, a person will be in better position to judge him as an author and evaluatehis skills at writing. Nonetheless, assumptions can certainly be made based on his novelwhich has already been published and has become a bestseller! The debutants who becomebestsellers certainly require a scrutiny and one similar attempt has been made here. Wehope that we will soon have another book by Prabhat Ranjan to read!