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इंसानियत:-
सब कहते हैं कि इन्सान में ख़ुदा होता है,किससे पूछूँ कि ये इन्सान कहाँ होता है?
अपना मजहब ऊँचा और गैरो का ओछा, ये सोच हमें इन्सान बनने ही नहीं देती।
दोस्त मेरी नजर में इंसान वही जो, दूसरे इंसान की जरुरत के वक्त काम आये,
जो धर्म,जाति,मजहब,जाँत पाँत से उठकर, भलाई, और मानवता के कार्य करे।
प्यार और सौहार्द की मिसाल कायम करे। इंसान वही जो लोगों का दर्द समझ सके,
और मिल बाँट कर उसको कम कर सके। किसी इंसान की तकलीफ देखकर अगर
आपकी रूह नहीं काँपती,तो इंसान बनने की प्रक्रिया आपकी जारी है।
हर हर कोई डॉक्‍टर,इंजीनियर,और आकींटेक्ट बनने के लिए दौड़ रहा है… पर इंसानियत के लिए कोई कदम भी नहीं बढ़ा रहा। आज के समय मै सबसे ज्यादा स्कोप इंसानियत के फील्ड मै है,जिसको लोग पीछे छोड्ते जा रहे हैं। हर इंसान सिर्फ अपने स्वार्थ को पाने को दौड़ रहा है। अपने निज स्वार्थ को पाने के लिए इंसान किस हद् तक गिर रहा है,ये बेहद सोचनीय स्थिति को इशारा करता है, हमें अपने स्वार्थ को भुलाकर इंसानियत को अपनाने की हर संभव पहल करनी ही चाहिए। करके देखिए बहुत ही अच्छा स्कोप है,और सिर्फ एक ये ही ऐसा करियर है,जिसमै 100% प्लेसमैंन्ट मिलेगा। जो आपको जिदंगी की हर ऊँचाई को छूने मै आपको भरपूर साथ देगा,इंसानियत का रास्ता एक ऐसा रास्ता है,जो अपनाले वही असली मै फरिस्ता है। इंसानियत ही सबसे बडा़ धर्म है,
पर अफसोस लोग निभाते नहीं आजकल.