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हम कौन होते हैं अपनी मात्रभूमि की रक्षा करने वाले ,

हम तो बस साधारण से कमजोर इन्सान हैं !

हे माता तुमने हमको शरण लिया समझा अपनी सेवा

के लायक ,

तब ये गौरव पूर्ण सम्मान तुमने हमको दिया !

अपनी मिट्टी से हमको फ़ौलाद बनाया धरा के जल से

लहू को हमारे तेजाब बनाया ,

सुला लूँगी गोद में अपने यह कह कर मन से हमारे मौत

के खौफ को दूर भगाया !

तब जाके हम तेरे कुछ काम आये वर्ना हम तो बस

साधारण से कमजोर इन्सान थे ,

अपनी सेवा का ये गौरव पूर्ण सम्मान एक तुम्ही हो

जिसने हमें दिलाया !!